गुजरात विधानसभा ने सर्वसम्मति से ‘गुजरात आतंकवाद और संगठित अपराध नियंत्रण (संशोधन) विधेयक-2026’ पारित कर दिया है। इस संशोधन के अनुसार, राज्य के मूल GUJCTOC अधिनियम से अब आतंकवादी कृत्यों से संबंधित प्रावधान हटा दिए गए हैं। अब से, आतंकवाद से जुड़े अपराधों की जाँच केंद्र सरकार के नए कानून ‘भारतीय दंड संहिता’ (BNS) के तहत की जाएगी।
राज्य सरकार के अनुसार, जब 2015 में GUJCTOC लागू हुआ था, तब इसमें आतंकवाद और संगठित अपराध, दोनों शामिल थे। हालाँकि, केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई नई ‘भारतीय दंड संहिता-2023’ (BNS) की धारा 113 में पहले से ही आतंकवाद-विरोधी कड़े प्रावधान शामिल हैं। यह बदलाव एक ही अपराध के लिए दो अलग-अलग कानूनों के तहत जाँच से बचने के लिए किया गया है।
इस संशोधन के बाद, GUJCTOC अधिनियम अब मुख्य रूप से ‘संगठित अपराध’ पर केंद्रित रहेगा। राज्य में गैंगस्टरों, रंगदारी वसूलने वालों और संगठित माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई इस कानून के तहत पहले की तरह ही जारी रहेगी, जबकि आतंकवादी गतिविधियों के लिए BNS की धाराएँ लागू होंगी।
पुराने IPC (1860) की जगह अब BNS लागू हो गया है। इस संशोधन विधेयक ने ‘दंड प्रक्रिया संहिता’ (CrPC) के स्थान पर नए ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023’ (BNSS) के संदर्भों के कार्यान्वयन को भी सुनिश्चित किया है। इस बदलाव का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में स्पष्टता लाना और दोहराव को रोकना है।









