‘मिर्जापुर: द मूवी’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और दर्शकों से इसे जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है। सीरीज के तौर पर ‘मिर्जापुर’ के तीन सीजन हिट रहे। ऐसे में जब मेकर्स ने इसे फिल्म के तौर पर बनाने का ऐलान किया तो दर्शकों ने बड़ी ही बेसब्री से इंतजार किया। ऐसे में जब ये फिल्म अब सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है तो इसे दर्शकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने चार ही दिनों में 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। फिल्म के गानों को भी संगीत प्रेमियों के बीच काफी पसंद किया जा रहा है। इस बीच फिल्म के एक गाने ‘शूरवीर’ को लेकर कॉपीराइट से जुड़ा बवाल भी खड़ा हो गया, हालांकि जल्दी ही ये सुलझ भी गया। अब इस फिल्म का एक और गाना सुर्खियों में है। ‘मिर्जापुरः द मूवी’ में नुसरत फतेह अली खान की एक कल्ट कव्वाली ‘सांसों की माला’ को भी शामिल किया गया है, जो अब सुर्खियां बटोर रही है।
मिर्जापुरः द मूवी में नुसरत फतेह अली खान की 49 साल पुरानी कव्वाली
‘मिर्जापुरः द मूवी’ में उस्ताद नुसरत फतेह अली खान की आवाज में अमर हुई कव्वाली ‘सांसों की माला पे’ को भी शामिल किया गया है, जो फिल्म के मिड-क्रेडिट सीक्वेंस में आता है। जैसे ही इस क्राइम-थ्रिलर में ये गाना आता है सुनने वालों को नुसरत साहब की याद दिला दी। मिर्जापुरः द मूवी में ‘सांसों की माला पे’ के जिस वर्जन को शामिल किया गाय है, उसमें नुसरत साहब की आवाज के साथ मधुर शर्मा और वैभव पानी के मॉर्डन म्यूजिक को मिक्स किया गया है।
मिर्जापुरः द मूवी के क्लाइमैक्स सीन में फूंकी जान
31 अगस्त को रिलीज हुआ ये गाना ‘मिर्जापुरः द मूवी’ के क्लाइमैक्स सीन का हिस्सा है। ये उस सीन में बजता है जिसमें बीना त्रिपाठी और उनके पुराने प्रेमी का जिक्र होता है। दर्शकों ने क्लाइमैक्स सीन के लिए इस गाने के चुनाव को लेकर मेकर्स की जमकर तारीफ की है। कई ने तो यहां तक कहा कि ये फिल्म के सबसे बेहतरीन हिस्सों में से एक है। वहीं कुछ ने गाने के नए वर्जन को भी हिट बताया है और अब सोशल मीडिया पर ये गाना फिर ट्रेंड किया जा रहा है।
नुसरत फतेह अली खान का कनेक्शन
उस्ताद नुसरत फतेह अली खान ने 1977 में कव्वाली ‘सांसों की माला पे’ गाया था। ये कव्वाली भारत के साथ नुसरत के जुड़ाव को भी दिखाती है। दरअसल, 1979 में नुसरत साहब की पहली यात्रा के दौरान बॉलीवुड के शोमैन राज कपूर ने नुसरत को ऋषि कपूर और नीतू सिंह की शादी में परफॉर्म करने के लिए बुलाया था, जहां उन्होंने इस कव्वाली से समां बांध दिया। बाद में यह नुसरत के कमर्शियल एल्बम में भी शामिल किया गया। ये रचना अक्सर मीराबाई से भी जोड़ी जाती है, क्योंकि इसकी भाषा और कल्पना कृष्ण भक्ति से भरी है। हालांकि, सूफीनामा के में कहा गया है कि ‘सांसों की माला पर सिमरूं निस-दिन पिया का नाम’ कवि तुफैल होशियारपुरी की रचना है और इसमें श्याम, मोहन, वृंदावन और गोकुल का ज़िक्र मिलता है।








