सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक बड़ा फैसला करते हुए 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट के दोषी और गैंगस्टर अबू सलेम की समय से पहले रिहाई की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। आपको बता दें कि बीते 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम की याचिका पर फैसला सुरक्षित कर लिया था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा अप्रैल में दिए गए फैसले को बरकरार रखा है।
क्या थी अबु सलेम की दलील?
अबू सलेम की तरफ से कहा गया था कि सजा में मिलने वाली छूट (remission) को जोड़ने पर उसने 25 साल की सजा पूरी कर ली है, इसलिए उसे रिहा किया जाए। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा था कि उसकी याचिका समय से पहले दायर की गई है। उसकी 25 साल की अवधि 2030 में पूरी होगी। कोर्ट ने सलेम की याचिका को समय से पहले और गलत धारणा पर आधारित बताया था। अबू सलेम ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को सही माना है। आपको बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी महीने में भी अबू सलेम की याचिका को खारिज कर दिया था।
अबू सलेम ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि पुर्तगाल से उसके प्रत्यर्पण की शर्तों के तहत भारत में जेल में उसके 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं। PTI के मुताबिक, भारत और पुर्तगाल के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते की शर्तों के अनुसार, अबू सलेम को मौत की सजा नहीं दी जा सकती और उसकी जेल की सजा 25 साल से अधिक नहीं हो सकती।
क्या है पूरा केस?
आपको बता दें कि 12 मार्च 1993 को मुंबई में एक के बाद एक 12 बड़े बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और करीब 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस मामले में अबू सलेम को साल 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किया गया था। अबु सलेम को कोर्ट ने मुंबई ब्लास्ट में शामिल होने के लिए आजीवन कारावास की सजा दी थी।
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