मोरबी आयुष अस्पताल की एक और बड़ी सफलता: 83 साल के बुजुर्ग को वेंटिलेटर से मिली नई जिंदगी

मोरबी: मोरबी आयुष हॉस्पिटल की एक और बड़ी कामयाबी, 83 साल के बुज़ुर्ग को वेंटिलेटर से मिली नई ज़िंदगी

मोरबी: क्रिटिकल केयर के क्षेत्र में लगातार कामयाबी का पर्याय बन चुके आयुष हॉस्पिटल में डॉ. सत्यजीतसिंह जडेजा साहब ने एक 83 साल के मरीज़ को गंभीर हालत से निकालकर नई ज़िंदगी दी है।

10 फरवरी, 2026 को आयुष हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट में एक 83 साल के मरीज़ को आधी बेहोशी की हालत में लाया गया। जांच के दौरान उनकी हालत बहुत चिंताजनक थी: ऑक्सीजन लेवल: सिर्फ़ 78 गंभीर बीमारी: एस्पिरेशन निमोनिया (दोनों फेफड़ों में बहुत ज़्यादा इन्फेक्शन) दूसरी दिक्कतें: दौरे पड़ना, दिल की धड़कन का अनियमित होना, खून की उल्टी होना और खून में सोडियम का लेवल बहुत कम होना। चूंकि मरीज़ का GCS (चेतना की हालत) लेवल बहुत कम था और सांस लेने में तकलीफ़ गंभीर थी, इसलिए उन्हें तुरंत वेंटिलेटर पर रखा गया। 83 साल की उम्र और एक ही समय में इतनी जानलेवा बीमारियों के बावजूद, डॉ. सत्यजीतसिंह जडेजा की गहरी जांच और सही इलाज से मरीज़ की हालत में तेज़ी से सुधार हुआ। मरीज़ सिर्फ़ एक हफ़्ते में पूरी तरह ठीक हो गया और उसे हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई। डॉ. सत्यजीतसिंह जडेजा की लीडरशिप में, आयुष हॉस्पिटल मुश्किल मामलों में लगातार सफलता हासिल कर रहा है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मॉडर्न इलाज और सही डायग्नोसिस से मुश्किल हालात में भी जान बचाई जा सकती है। आज, आयुष हॉस्पिटल मोरबी और कच्छ ज़िलों के मरीज़ों के लिए ‘भरोसे का सेंटर’ और ‘उम्मीद की किरण’ बन गया है।

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Author: vatsalyanews

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