भावी शिक्षकों के धैर्य की परीक्षा या सिस्टम की लापरवाही? TET-1 परीक्षा में उलझे अभ्यर्थी!

वात्सल्यम समाचार,

पूजा ठक्कर – मुंडारा कच्छ।

भावी शिक्षकों के धैर्य की परीक्षा या सिस्टम की लापरवाही? TET-1 परीक्षा में उलझे अभ्यर्थी!

अहमदाबाद, दिनांक 21: गुजरात राज्य परीक्षा बोर्ड द्वारा आज आयोजित टीईटी-1 की परीक्षा प्रणाली में घोर लापरवाही और बेढंगी योजना का मामला सामने आया है। राज्य के भविष्य निर्माता माने जाने वाले लगभग 1 लाख अभ्यर्थी आज परीक्षा देने से पहले मानसिक रूप से टूट गए। ‘डिजिटल गुजरात’ के बड़े-बड़े दावों के बीच प्रशासन की एक छोटी सी गलती के कारण हजारों छात्रों को परीक्षा केंद्र की तलाश में घंटों भटकना पड़ा।

परीक्षा बोर्ड की सबसे बड़ी अक्षम्य कमजोरी यह थी कि अहमदाबाद जैसे महानगर में भी एक ही नाम के कई स्कूल थे, अभ्यर्थियों के कॉल लेटर में अधूरे या अस्पष्ट पते दिए गए थे। इन सीमित विवरणों के कारण परेशानी में पड़े अभ्यर्थियों ने जब गूगल मैप्स का सहारा लिया तो तकनीक ने भी अधूरी जानकारी के कारण उन्हें भटका दिया। उसी नाम के दूसरे स्कूल में पहुंचे सैकड़ों परीक्षार्थी अंतिम समय में सही केंद्र तक पहुंचने के लिए मशक्कत करते दिखे। इस चक्रव्यूह में परीक्षार्थी परीक्षा शुरू होने से पहले ही शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह सड़ जाते हैं, जिसके लिए सीधे तौर पर शिक्षा विभाग का अनाड़ी प्रशासन जिम्मेदार है।

ऐसा लगा जैसे सिस्टम ने अन्य जिलों, विशेषकर कच्छ के अभ्यर्थियों के साथ क्रूर मजाक किया हो। कच्छ में परीक्षा केंद्र आवंटित न करके अभ्यर्थियों को 400 किमी दूर अहमदाबाद धकेल दिया गया। अहमदाबाद के ग्रामीण इलाकों में केंद्रित, रिक्शा चालकों और निजी टैक्सियों ने मनमाना किराया वसूल कर बेरोजगार युवाओं को आर्थिक रूप से शिकार बनाया। ओला जैसे ऑनलाइन ट्रैवल ऐप पर सवारी बुक करने के बावजूद तय किराया से ज्यादा वसूलने की भी शिकायतें मिलीं। इस दौड़ के बीच में, अहमदाबाद में दो उम्मीदवारों को सड़क पार करते समय दुर्घटना का शिकार होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यदि सिस्टम ने आसपास के जिलों में केंद्र आवंटित किए होते तो शायद इस खूनी परीक्षा की स्थिति से बचा जा सकता था।

सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि खुद को ‘संवेदनशील’ कहने वाली और ‘नरम-दृढ़’ होने का दावा करने वाली सरकार इतनी बड़ी गड़बड़ी के सामने चुप क्यों है? जब 10वीं और 12वीं के लाखों छात्र अपने ही जिले में परीक्षा दे सकते हैं तो प्रदेश के भावी शिक्षकों को सैकड़ों किलोमीटर दूर धकेल कर ‘सुशासन’ कैसे साबित किया जा रहा है? आज की पुरजोर मांग है कि नरम एवं दृढ़ मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्रभाई पटेल एवं युवा एवं प्रगतिशील मंत्री श्री हर्ष संघवी इस गंभीर लापरवाही पर अपनी चुप्पी तोड़ें तथा जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्यवाही करें। शिक्षित युवाओं को इस तरह बेसहारा छोड़ देना व्यवस्था की घोर विफलता है और इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

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Author: vatsalyanews

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