तिब्बत सीमा के पास आई भीषण बाढ़ के आठवें दिन संसद को संबोधित करते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भारत समेत मित्र देशों की मदद की सराहना की है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भारत और चीन को उस समय मदद के लिए धन्यवाद दिया, जब हिमालयी देश में आई भयानक बाढ़ से 1,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई। नेपाल की संसद में बोलते हुए शाह ने कहा कि इतनी बड़ी आपदा के समय अंतरराष्ट्रीय मदद लेने से इनकार करने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि नेपाल ने समय पर मदद पाने के लिए निजी क्षेत्र में दूसरे देशों के साथ तालमेल बिठाया था।
95 शवों की पहचान हो गई है
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा कि अब तक मिले 1,114 शवों में से सिर्फ 95 की पहचान हो सकी है. डीएनए और पहचान के दूसरे तरीकों को सुरक्षित रखने के लिए शवों को ज़मीन के अंदर रखा गया है। घटना के बाद से 11,993 लोगों को बचाया जा चुका है, जबकि 3,916 लोग अब भी लापता हैं। उन्होंने राहत और बचाव कार्य में प्रगति, राहत कोष, जान माल के नुक़सान, समय पर जानकारी और जलवायु परिवर्तन को लेकर कई बातें कहीं।
नेपाल के पीएम ने क्या क्या बताया
उन्होंने कहा, “हमारे मित्र देशों, चीन और भारत ने टेक्नीशियन भेजे थे। पहले ही दिन से उन्होंने इलाके में हुए नुकसान का अंदाज़ा लगाने और यह पता लगाने के लिए कि क्या उस जगह तक पहुंचना मुमकिन है, हवाई सर्वे समेत कई तरह की जांच-पड़ताल की।”
उन्होंने आगे बताया कि भारतीय टेक्नीशियन जितनी जल्दी हो सका, दूर-दराज़ के इलाकों तक पहुंच पाए। उन्होंने कहा, “यह एक असाधारण स्थिति थी। वहां कीचड़ और गाद इतनी ज़्यादा थी कि न सिर्फ़ खुदाई करने वाली मशीनों (एक्सकेवेटर) के लिए, बल्कि सेना और आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स के जवानों के लिए भी खड़े होने की जगह नहीं थी।”
ऐसी घटना की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह ऐसी घटना थी जिसकी भविष्यवाणी नहीं की जा सकती थी। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों को सतर्क करने की कोशिश कर रहे सुरक्षा बलों के जवान भी लापता हो गए हैं। लोगों को पहले से चेतावनी देने के लिए 11 लाख से ज्यादा एसएमएस भेजे गए और फ़ोन कॉल किए गए।
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