भारत में लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। जो बीमारियां शरीर में 60 की उम्र में लगती थीं वो अब 40 की उम्र में ही होने लगी हैं। इसलिए आज के 40 को न्यू 60 नाम दिया जाने लगा है। कम उम्र में तेजी से बढ़ने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में इंसुलिन प्रतिरोध, टाइप 2 डायबिटीज, फैटी लिवर रोग, मोटापा और हार्ट की बीमारियां चिंता का विषय बनती जा रही हैं। शारदा हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ भुमेश त्यागी ने बताया कि शरीर का वजन बढ़ना ही समस्या नहीं है बल्कि शरीर के अंदर होने वाली मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं भी अहम है।
पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में उम्र में डायबिटीज, हार्ट की बीमारी, इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ना, फैटी लिवर और मोटापे जैसी समस्याएं हो रही हैं। कई बार आप पतले दिख सकते हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आपके शरीर में सब कुछ ठीक है। कई बार कम वजन में भी समस्या विकसित हो सकती हैं। आपका बीएमआई नॉर्मल हो सकता है लेकिन फिर भी आपका चयापचय किसी मोटे व्यक्ति जैसा हो सकता है। यही वजह है कि वजन या बीएमआई को देखकर किसी व्यक्ति के चयापचय हेल्दी होने का पता नहीं लगाया जा सकता है।
इन बीमारियों का बढ़ रहा है खतरा
डायबिटीज- भारत में डायबिटीज के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। इंसुलिन प्रतिरोध प्रीडायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज में बदल सकता है। भारतीयों में 30 और 40 साल की उम्र के लोगों में अब ये दिखाई देने लगा है। दुबला-पतला शरीर होने के बाद भी लोग इसका शिकार हो रहे हैं। शरीर में छिपा हुआ फैट और बढ़ता हुआ शुगर खतरनाक साबित हो रहा है।
फैटी लिवर- दिल्ली एनसीआर में रहने वाले और दफ्तरों में काम करने वाले ज्यादातर लोग फैटी लिवर के शिकार हो रहे हैं। कई बार लोग दिखने में पतले लग सकते हैं लेकिन डाइट और लाफस्टाइल की वजह से लिवर में धीरे-धीरे फैट बढ़ने लगता है। पहले ये बीमारी बहुत कम लोगों को या फिर लेट 60 में होती थी, लेकिन अब 20-30 साल के युवाओं को भी फैटी लिवर हो रहा है।
हार्ट की बीमारी- शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ना खतरनाक है, लेकिन युवाओं में इसके सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। दिल की बीमारी 30-40 की उम्र में होने लगी हैं। हार्ट अटैक, लंबे समय तक सूजन और हाई एलपी(ए) जैसी समस्याएं धमनियों को नुकसान पहुंचा सकती हैं और समय से पहले दिल का दौरा पड़ने का कारण बन सकता है।
हार्मोनल स्वास्थ्य- सिर्फ ये बीमारी ही नहीं बल्कि हार्मोनल हेल्थ पर भी इसका असर हो रहा है। युवाओं में पीसीओएस, टेस्टोस्टेरोन के स्तर में गिरावट और थायरॉइड संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। जो इंसुलिन प्रतिरोध से जुड़ी हैं।
हाई ब्लड प्रेशर- जिस तरह की लाइफस्टाइल हम जी रहे हैं उसमें बड़ी संख्या में युवा हाई ब्लड प्रेशर और हाइपटेंशन के शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा मेटाबॉलिक डिजीज का खतरा तेजी से पनप रहा है।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)









