वात्सल्यम समाचार
मदन वैष्णव
कहते हैं कि “जो राम रखते हैं, उसे कौन चख सकता है”, यह कहावत आज डांग जिले के वघई में सच हो गई है। 13 साल पहले डांग जिले के वघई तालुका के वनरचोंड गांव का एक बेटा अचानक गायब हो गया था और परिवार ने उम्मीद छोड़ दी थी, बेटे को डांग जिले की वघई पुलिस टीम ने ढूंढकर उसके परिवार से मिला दिया, जिससे पूरे इलाके में खुशी का माहौल है। मूल रूप से वनरचोंड (ता. वघई, जिला डांग) के रहने वाले रंजीतभाई चिंटूभाई चौधरी साल 2012-13 में राफेल कॉलेज, वापी में पढ़ रहे थे। उस समय वह बिना किसी को बताए हॉस्टल से कहीं चले गए थे। परिवार ने बहुत ढूंढा लेकिन रंजीत का कोई पता नहीं चला। इस बारे में साल 2013 में पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। उस समय मौजूदा डांग पुलिस अधीक्षक पूजा यादव के निर्देश पर ‘ऑपरेशन मिलाप’ के तहत लापता लोगों को ढूंढने का अभियान चलाया गया था। वघई पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर वी.के. गढ़वी ने संवेदनशीलता दिखाई और रंजीत की पुरानी डिटेल्स पता कीं। उन्होंने वापी में रंजीत के साथ पढ़ने वाले दोस्तों और हॉस्टल के स्टूडेंट्स से पूछताछ की। टेक्निकल और ह्यूमन सोर्स की मदद से वघई पुलिस को पक्की जानकारी मिली कि रंजीत कच्छ जिले के गांधीधाम में है। जानकारी मिलते ही वघई PSI एम.एस. राजपूत और उनकी टीम को तुरंत कच्छ भेजा गया। वहां रंजीत से कॉन्टैक्ट किया गया, उसे सही काउंसलिंग दी गई और सुरक्षित वघई पुलिस स्टेशन लाया गया। रंजीत के 13 साल बाद ज़िंदा लौटने की खबर वनरचोंड गांव में जंगल की आग की तरह फैल गई। बहुत खुश परिवार वाले और बड़ी संख्या में गांव वाले वघई पुलिस स्टेशन पर जमा हो गए थे। माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू थे। परिवार वालों और गांव वालों ने रंजीत की आरती उतारकर और उसे माला पहनाकर उसका शानदार स्वागत किया। गांव वालों ने वघई पुलिस के इस इंसानियत और ईमानदारी भरे काम की तारीफ़ करते हुए उन्हें गुलदस्ते दिए और पूरी पुलिस टीम का शुक्रिया अदा किया।









