10 yrs of Mudra scheme: 10 साल में 52.37 करोड़ को मिला 33.65 लाख करोड़ रुपये का ऋण – number of loans approved in the year 2024 25

सूक्ष्म व छोटे उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना को आज 10 साल पूर हो चुके हैं। इस दौरान इस योजना के तहत 50 करोड़ से ज्यादा ऋण दिए जा चुके हैं। लेकिन बीते 8 सालों में पिछले वित्त वर्ष ऋण लेने वालों की संख्या सबसे कम रही। मुद्रा योजना के तहत बिना किसी जमानत के 20 लाख रुपये तक का ऋण दिया जाता है।

मुद्रा योजना से बीते 10 सालों में कितनों को और कितना मिला ऋण?
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कहा, ” मुद्रा योजना  का उद्देश्य परिश्रमी सूक्ष्म उद्यमों और पहली पीढ़ी के उद्यमियों को सशक्त बनाना है। इस योजना के माध्यम उन छोटे उद्यमों को बिना किसी जमानत के ऋण प्रदान किए गए, जिन्हें औपचारिक संस्थागत ऋण लेने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।” बीते 10 साल में इस योजना के तहत 52.37 करोड़ से अधिक मुद्रा ऋण दिए गए हैं। मुद्रा ऋण लेने वालों को अब 21 मार्च 2025 तक कुल 33.65 लाख करोड़ रुपये का ऋण दिया जा चुका है।


मुद्रा योजना में महिलाओं को मिला सबसे अधिक ऋण

मुद्रा योजना के तहत सबसे अधिक ऋण महिलाओं द्वारा लिया जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार कुल मुद्रा ऋण में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी है, जबकि पुरुषों की हिस्सेदारी 30 फीसदी ही है। महिलाओं द्वारा लिए गए औसत ऋण में बीते 10 वर्षों के दौरान 160 फीसदी इजाफा हुआ है। कुल मुद्रा ऋण में एससी, एसटी व ओबीसी की आधी हिस्सेदारी रही।

क्या है मुद्रा योजना और इसकी विशेषताएं?

मुद्रा योजना का उद्देश्य ऐसे सूक्ष्म व छोटे उद्यमियों को सशक्त बनाना है, जिनकी औपचारिक संस्थागत ऋण देने वालों  तक पहुंच नहीं है। मुद्रा योजना के तहत इस समय 4 कैटेगरी ‘शिशु’, ‘किशोर’, ‘तरुण’ और हाल में नई जोड़ी गई श्रेणी ‘तरुण प्लस’ केटेगरी में ऋण दिए जा रहे हैं। शिशु कैटेगरी के तहत 50,000 रुपये तक के, किशोर के तहत  50,000 रुपये से 5 लाख रुपये तक, तरुण के तहत  5 से 10 लाख रुपये तक और तरुण प्लस के तहत 10 से 20 लाख रुपये तक के ऋण प्रदान किए जाते हैं।

सबसे ज्यादा 50 हजार रुपये तक के ऋण लिए गए
मुद्रा योजना सूक्ष्म उद्यमियों के लिए काफी फायदेमंद हो रही है क्योंकि बीते 10 साल के दौरान योजना के तहत शिशु केटेगरी में सबसे अधिक ऋण दिए गए हैं। कुल ऋण में शिशु  कैटेगरी  यानी 50 हजार रुपये तक ऋणों की संख्या सबसे अधिक 78 फीसदी रही। इसके बाद 20 फीसदी हिस्सेदारी किशोर यानी 50,000 से 5 लाख रुपये के ऋण लेने वालों की रही। कुल स्वीकृत ऋण में शिशु कैटेगरी की हिस्सेदारी 35 फीसदी, किशोर की 40 फीसदी और तरुण कैटेगरी की 25 फीसदी दर्ज की गई।

वर्ष 2024-25 में ऋण लेने वालों की संख्या बीते 8 साल में सबसे कम
मुद्रा योजना ने बीते 10 साल के दौरान के दौरान भले ही बड़ी सफलता हासिल की हो। लेकिन बीते वित्त वर्ष इस योजना के लाभार्थियों की संख्या में कमी आई है। वर्ष 2024-25 में 21 मार्च 2025 तक स्वीकृत ऋणों की संख्या 4.53 करोड़ दर्ज की गई जो 2017-18 के बाद से सबसे कम है। वर्ष 2017-18 में इनकी संख्या 4.81 करोड़ थी। वर्ष 2024-25 में वर्ष 2023-24 की तुलना में स्वीकृत ऋणों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 2023-24 में स्वीकृत ऋणों की संख्या सबसे अधिक 6.67 करोड़ थी, जो 2024-25 में घटकर 4.53 करोड़ रह गई। वर्ष 2024-25 में ऋणों की स्वीकृत राशि इससे पहले वर्ष की 5.41 लाख करोड़ रुपये राशि की तुलना में घटकर 4.77 करोड़ रुपये रह गई।


First Published – April 8, 2025 | 4:07 PM IST



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Author: vatsalyanews

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