Highlights
- उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर फिल्म फेस्टिवल में पूरा वंदे मातरम गाया, कांग्रेस ने जताई आपत्ति।
- कांग्रेस के सहयोगी भी वंदे मातरम पर उसके कड़े रुख का खुलकर समर्थन नहीं कर रहे हैं।
- बीजेपी ने कांग्रेस पर कट्टरपंथियों के दबाव में काम करने का आरोप लगाकर हमला बोला।
नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का वंदे मातरम् गाते हुए वीडियो सामने आया है। श्रीनगर में 7 सितंबर को फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन के दौरान वंदे मातरम् का गायन हुआ। करीब 3 मिनट 10 सेकंड तक चले इस पूरे गायन के दौरान उमर अब्दुल्ला खड़े रहे। उनके पिता और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला भी मौजूद रहे। इस वीडियो के सामने आने के बाद कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि वंदे मातरम् का पूरा संस्करण उस बहुलतावादी और समावेशी सोच के अनुरूप नहीं है, जिसे स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत के लिए अपनाया था।
कांग्रेस ने क्या कहा?
केसी वेणुगोपाल ने अपने बयान में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, आचार्य नरेंद्र देव, मौलाना आजाद, सरोजिनी नायडू और जे.बी. कृपलानी के विचारों और फैसलों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने सहयोगियों से सम्मानपूर्वक आग्रह करती है कि वे स्वतंत्रता सेनानियों की समझ और फैसले का सम्मान करें। कांग्रेस का कहना है कि वंदे मातरम् के उस संस्करण को ही गाया जाना चाहिए, जिसे उस समय के नेताओं ने अपनाया था।
वेणुगोपाल के मुताबिक, उस संस्करण को इसलिए चुना गया था ताकि गीत को सांप्रदायिक रंग न दिया जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए यही रास्ता भारत की धर्मनिरपेक्ष और सबको साथ लेकर चलने वाली पहचान को बनाए रखने का है।
बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस की आपत्ति पर बीजेपी ने तीखा हमला बोला है। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कट्टरपंथियों के हाथ की कठपुतली बन गई है। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस के सहयोगी ही उसके रुख से सहमत नहीं दिख रहे हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस के सहयोगियों को वंदे मातरम् के पूरे गीत से परेशानी नहीं है, तो कांग्रेस इस मुद्दे पर इतना कड़ा रुख क्यों अपना रही है।
सोनिया गांधी के वीडियो से शुरू हुआ विवाद
वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस का मौजूदा रुख 15 अगस्त के उस वीडियो के बाद चर्चा में आया था, जिसमें कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् बजाए जाने के दौरान सोनिया गांधी अंतरा गाए जाने के बाद इसे रोकने का इशारा करती नजर आई थीं। इस वीडियो के सामने आने के बाद कांग्रेस से माफी की मांग भी उठी। देश के कुछ हिस्सों में इस मामले को लेकर केस दर्ज होने की खबरें भी सामने आईं। कांग्रेस ने इस पर अलग-अलग सफाई दी, लेकिन पार्टी अपने रुख पर कायम रही। बाद में कांग्रेस ने साफ कर दिया कि पार्टी वंदे मातरम् के सिर्फ दो अंतरे ही गाएगी। पार्टी की कार्यकारिणी में इस संबंध में प्रस्ताव भी पारित किया गया और 18 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी का रुख स्पष्ट किया।
उमर अब्दुल्ला का स्टैंड पहले से साफ
उमर अब्दुल्ला का वंदे मातरम् को लेकर रुख हालांकि पहले से ही साफ रहा है। 15 अगस्त को सोनिया गांधी के वीडियो को लेकर जब उमर से सवाल पूछा गया था, तब उन्होंने वंदे मातरम् को पूरा गाने की पैरवी की थी। यानी 7 सितंबर को श्रीनगर के फिल्म फेस्टिवल में उमर का पूरे वंदे मातरम् के दौरान खड़े रहना कोई अचानक बदला हुआ रुख नहीं है। वह पहले भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष साफ कर चुके हैं। बता दें कि वंदे मातरम् के सम्मान को लेकर बीजेपी ने महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है।
कांग्रेस के सहयोगी भी नहीं दे रहे पूरा साथ
वंदे मातरम् के मुद्दे पर कांग्रेस अकेली पड़ती हुई भी नजर आ रही है। विपक्षी गठबंधन की कई पार्टियां कांग्रेस के रुख से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। आइए, जानते हैं किस पार्टी का इस मसले पर क्या रुख है:
- कांग्रेस का कहना है कि पार्टी केवल दो अंतरे गाएगी।
- नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पूरा गीत गाने के पक्ष में हैं।
- टीएमसी ने पूरे अंतरे अनिवार्य किए जाने का विरोध किया है, लेकिन कांग्रेस की तरह पूरे गीत को लेकर कड़ा विरोध नहीं जताया है।
- समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर पूरे गीत के विरोध में नहीं है।
- उद्धव ठाकरे की शिवसेना UBT ने कांग्रेस की लाइन का समर्थन नहीं किया है।
- डीएमके पूरे छह अंतरे अनिवार्य किए जाने का विरोध कर रही है।
- आरजेडी की पार्टी लाइन अभी पूरी तरह साफ नहीं है।
- शरद पवार की NCP-SP ने भी कांग्रेस की तरह वंदे मातरम् का विरोध नहीं जताया है।
क्या वंदे मातरम् पर कांग्रेस अलग-थलग पड़ रही है?
यही सवाल अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा है। एक तरफ पार्टी ने वंदे मातरम् के सिर्फ दो अंतरे गाने का फैसला किया है, तो दूसरी तरफ उसके कई सहयोगी इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ खड़े नजर नहीं आ रहे। उमर अब्दुल्ला का पूरा वंदे मातरम् गाना कांग्रेस के लिए इसलिए भी मुश्किल सवाल बन गया है क्योंकि वह विपक्षी गठबंधन के ही अहम सहयोगी हैं। कांग्रेस जिस मुद्दे पर अपना रुख लगातार साफ कर रही है, उसी मुद्दे पर उसके सहयोगियों की अलग-अलग राय सामने आने से अब सवाल उठ रहा है कि कहीं वंदे मातरम् पर कड़ा रुख अपनाकर कांग्रेस राजनीतिक तौर पर अकेली तो नहीं पड़ रही।
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