आवारा कुत्तों की समस्या पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने डॉग लवर्स और एडमिनिस्ट्रेशन को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि कुत्तों में एक खास तरह का वायरस होता है जिसका कोई डायग्नोसिस नहीं है। अगर कोई कुत्ता 9 साल के बच्चे पर हमला करता है तो कौन ज़िम्मेदार है? सरकार कुछ नहीं कर रही है। अगर कुत्ता जितनी बार काट सकता है काटता है या कोई मर जाता है, तो हम सरकार को मुआवज़ा देने का आदेश देंगे।
इस बारे में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रणथंभौर नेशनल पार्क में जिन टाइगर्स को कुत्ते मार रहे थे, वे भी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। जब कोई कुत्ता 9 साल के बच्चे पर हमला करता है, तो इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है? उन्हें खाना खिलाने वाली संस्था या हमें इस मामले पर आंखें मूंद लेनी चाहिए। जो डॉग लवर्स आवारा कुत्तों को खाना खिलाते हैं, उन्हें कुत्तों को अपने घर ले जाना चाहिए।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने आगे कहा कि उन लोगों की ज़िम्मेदारी तय होनी चाहिए जो कहते हैं कि हम कुत्तों को खाना खिलाते हैं। सरकार कुछ नहीं कर रही है। हम अब राज्य सरकारों को न सिर्फ़ ज़िम्मेदारी लेने का आदेश देंगे, बल्कि पीड़ित को खास मुआवज़ा देने का भी आदेश देंगे। हम आदेश देंगे कि सरकार को हर कुत्ते के काटने पर भारी मुआवज़ा देना होगा।









