युवराजसिंह जडेजा की जनता रेड के बाद अरावली बयाड में नकली दूध का नेटवर्क साबर डेयरी चेयरमैन के गांव तक पहुंचा

किरीट पटेल बयाड

अरावली बयाड में नकली दूध का नेटवर्क: युवराजसिंह जडेजा के ‘जनता रेड’ के बाद, साबर डेयरी के चेयरमैन के गांव पहुंची ट्रेन
बयाड: गुजरात में पढ़ाई के बाद अब व्हाइट रेवोल्यूशन में भी ‘नकली’ का खेल सामने आने से हड़कंप मच गया है। स्टूडेंट लीडर और क्षत्रिय नेता युवराजसिंह जडेजा ने फिल्मी अंदाज में नकली दूध से भरे टैंकर का पीछा किया, जिससे कोऑपरेटिव जगत में भूचाल आ गया। इस स्कैम के तार अब साबर डेयरी के चेयरमैन शामलभाई पटेल के होमटाउन पिपोदरा तक पहुंच गए हैं और अब कई सवाल खड़े हो गए हैं।
युवराजसिंह जडेजा ने कुछ समय से अरावली जिले के बयाड तालुका में नकली दूध का एक बड़ा नेटवर्क चलने की जानकारी के आधार पर निगरानी रखी थी। देर रात एक संदिग्ध टैंकर का पीछा किया गया। पता चला है कि इस टैंकर में नकली दूध भरकर लोकल मिल्क सोसाइटियों में खाली किया जाने वाला था। युवराज सिंह ने आरोप लगाया है कि लोगों की सेहत के लिए नुकसानदायक यह सफेद जहर डेयरी में सिस्टमैटिक तरीके से मिलाया जा रहा था।
अमोदरा और पिपोदरा सोसाइटियां शक के दायरे में
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह नकली दूध अरावली के अमोदरा और पिपोदरा गांवों की कोऑपरेटिव सोसाइटियों में डंप किए जाने का खुलासा हुआ है। पिपोदरा गांव साबर डेयरी के मौजूदा चेयरमैन शामलभाई पटेल का पैतृक गांव है। अगर चेयरमैन के ही गांव की सोसायटी में नकली दूध लिया जा रहा है, तो यह नेटवर्क कितना गहरा होगा, यह सोच से परे है।
बड़े लोगों के शामिल होने की चर्चा
लोकल लेवल पर और सोशल मीडिया पर इस बात की जोरदार चर्चा चल रही है कि यह पूरा स्कैम किसी छोटे आदमी का काम नहीं है। अगर लाखों लीटर नकली दूध सिस्टम में आ रहा है, तो इसे ऊपर से वरदहस्त जरूर है। पिपोदरा गांव का नाम आने से शामलभाई पटेल समेत डेयरी के दूसरे अधिकारियों पर भी उंगलियां उठ रही हैं। लोग पूछ रहे हैं:
क्या चेयरमैन को नहीं पता था कि उनके ही गांव की सोसायटी में क्या चल रहा है? क्या इस स्कैम में डेयरी के बड़े अधिकारियों या नेताओं की मिलीभगत है?
अगर आम पशुपालकों के दूध के दाम घटाए जा रहे हैं, तो नकली दूध पर आंखें क्यों मूंदे हुए हैं?
युवराजसिंह जडेजा ने इस मामले की सख्त जांच की मांग की है और कहा है कि यह सिर्फ एक टैंकर नहीं, बल्कि एक पूरा रैकेट है जो नॉर्थ गुजरात के पशुपालकों और कंज्यूमर्स के साथ धोखा कर रहा है। अगर निष्पक्ष जांच की जाए तो कई ‘सफेदपोश’ चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
फिलहाल यह टॉपिक सबर डेयरी और कोऑपरेटिव सेक्टर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अब देखना यह है कि क्या एडमिनिस्ट्रेशन इस मामले में सख्त एक्शन लेगा या बड़े लोगों को बचाने के लिए मामले को दबाया जाएगा।

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Author: vatsalyanews

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