वेदांत, हिंडाल्को समेत 130 कंपनियों को कार्बन क्रेडिट व्यापार के तहत उत्सर्जन घटाने का निर्देश – 130 companies including vedanta hindalco instructions to reduce emissions under carbon credit trade

भारत ने कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए पहली बार एक अनुपालन ढांचे की शुरुआत की है। एल्युमीनियम, सीमेंट, क्लोर-अल्कली और लुग्दी एवं कागज उद्योग में ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के लिए यह नया ढांचा शुरू किया गया है। फिलहाल इस ढांचे का मसौदा जारी किया गया है जिसमें कार्बन क्रेडिट कारोबार या कुछ खास क्षेत्रों एवं कंपनियों के लिए उत्सर्जन में कमी का लक्ष्य तय कर उत्सर्जन में कमी लाने का जिक्र किया गया है।

इस मसौदे में 130 से अधिक औद्योगिक इकाइयों के लिए उत्सर्जन में कमी और इसकी समयसीमा तय की गई है। इन इकाइयों में वेदांत, हिंडाल्को, नालको, अल्ट्राटेक, एसीसी, अंबुजा, डालमिया और जेएसडब्ल्यू सीमेंट भी शामिल हैं।

बुधवार को इस संबंध में राजपत्रित मसौदा अधिसूचना जारी एवं प्रकाशित हुई। इसमें पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) ने भारत के कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (सीसीटीएस) 2023 के हिस्से के रूप में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (जीईआई) में कटौती के लक्ष्य से जुड़े नियम,2025 का प्रस्ताव किया है।

इन नियमों का मुख्य मकसद ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी के जरिये जीईआई घटाकर राष्ट्र निर्धारित योगदान (एनडीसी) तय करना है। मंत्रालय की मसौदा अधिसूचना के अनुसार इसका एक और लक्ष्य परंपरागत रूप से अधिक उत्सर्जन करने वाले क्षेत्रों में टिकाऊ, नई तकनीकों का इस्तेमाल कर जलवायु परिवर्तन के खतरे से निपटना है। इस ढांचे के अंतर्गत ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) निर्धारित क्षेत्रों के लिए  उत्सर्जन तीव्रता लक्ष्य (ईआईटी) तय करेगा। इन लक्ष्यों का निर्धारण प्रति टन समतुल्य उत्पादन पर कार्बन डाईऑक्साइड समतुल्य उत्सर्जन के संदर्भ में किया जाएगा। ये लक्ष्य वित्त वर्ष 2026 से वित्त वर्ष 2027 तक लागू होंगे और वित्त वर्ष 2024 को आधार बनाकर आंकड़े तैयार किए जाएंगे।

अधिसूचना के अनुसार जिन इकाइयों के लिए ये लक्ष्य तय किए गए हैं उन्हें सीसीटीएस को ध्यान में रखते हुए निर्धारित समयसीमा के अनुसार ही जीईआई लक्ष्य हासिल करने होंगे।

उदाहरण के लिए ओडिशा में वेदांत लिमिटेड के स्मेल्टर 2 को वित्त वर्ष 2026 में उत्सर्जन वित्त वर्ष 2024 के 13.4927 टीसीओ2 से घटाकर 13.2260 करना होगा और 2027 में इसे और घटाकर  12.8259टीसीओ2 तक लाना होगा। इसी तरह, ओडिशा के अंगुल में नालको स्मेल्टर ऐंड पावर कॉम्प्लेक्स को उत्सर्जन वित्त वर्ष 2024 के 17.3505 सीओ2 से घटाकर वित्त वर्ष 2027 तक 16.2479 सीओ2 करना होगा। अन्य कंपनियों जैसे कर्नाटक में जेके सीमेंट, आंध्र प्रदेश में  डालमिया (भारत) लिमिटेड और कोटा में डीसीएम श्रीराम कंसोलिडेटेड लिमिटेड के क्लोर अल्कली संयंत्र को भी उत्सर्जन में कमी लाने के निर्देश दिए गए हैं।

अगर ये इकाइयां अपने उत्सर्जन लक्ष्य प्राप्त करने में असफल रहती हैं तो उन्हें संबंधित अनुपालन वर्ष में कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्र खरीदने होंगे या केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा लगाए जाने वाले जुर्माने का भुगतान करना होगा। संबंधित अनुपालन वर्ष में यह जुर्माना जिस मूल्य पर कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्रों का कारोबार हो रहा है उसके औसत मूल्य के दोगुना के बराबर होगा। इकाइयों को 90 दिनों के भीतर इस जुर्माने का भुगतान करना होगा।


First Published – April 22, 2025 | 10:43 PM IST



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