मिलवुड केन इंटरनेशनल के फाउंडर एंव सीईओ निश भट्ट ने कहा, “RBI ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह समय से पहले कदम उठाने वाला केंद्रीय बैंक है। वैश्विक अस्थिरता के बीच जहां एक ओर RBI ने विकास को सहारा देने के लिए दरों में कटौती की है, वहीं उसने ‘न्यूट्रल’ से ‘उदारवादी’ (Accommodative) नीति रुख की ओर भी तेजी से बदलाव किया है।”
उन्होंने आगे कहा कि यह नीति परिवर्तन संकेत देता है कि RBI आगे भी जरूरत पड़ने पर दरों में और कटौती करने की स्थिति में है। RBI ने यह भी स्पष्ट किया कि महंगाई नियंत्रण में है और आगे का आर्थिक विकास गैर-मुद्रास्फीतिक (non-inflationary) रहेगा—यह मौद्रिक नीति का एक अहम बिंदु रहा।
RBI ने अपना काम बखूबी किया है और समय पर इंडस्ट्री को ज़रूरी राहत दी है। अब सरकार को चाहिए कि वह अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद का हल निकालने के लिए बातचीत शुरू करे। भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है, लेकिन ट्रेड टैरिफ, भू-राजनीतिक तनाव और संरक्षणवाद जैसे वैश्विक जोखिमों के चलते सुस्ती की चुनौती बनी हुई है।









