वोट काउंटिंग के लिए टोटलाइजर मशीन के उपयोग की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ‘केंद्र सरकार का रुख जानना चाहेंगे’

चुनाव मे मतगणना के लिए टोटलाइजर मशीन के उपयोग की मांग के मामले को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। इस 2014 मे दाखिल की गई जनहित याचिका में अलग-अलग EVM के वोटों की वार्ड के हिसाब से गिनती करने के बजाय पूरे संसदीय क्षेत्र के वोटों की गणना एक साथ टोटलाइजर से कराने की मांग की गई है। अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से याचिका पर राय मांगी है। CJI ने कहा है कि हम टोटलाइजर इंट्रोड्यूस करने के नियमों में बदलाव पर केंद्र सरकार का रुख जानना चाहेंगे।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान भारत निर्वाचन आयोग यानी चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि इसके (टोटलाइजर मशीन के उपयोग) लिए कानूनी बदलाव की जरूरत है-जो आयोग के दायरे में नहीं है। शुरू में आयोग ने सरकार से गुहार लगाई थी, सरकार ने एक्सपर्ट कमिटी बनाई थी, वह राजी नहीं हुई। ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने भी इसका विरोध किया। 

फायदे और नुकसान पर हुई चर्चा

CJI ने कहा कि “मेरे हिसाब से चुनावों की निष्पक्षता के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है? जब वे मैन्युअल रूप से गिनती करते हैं, या मशीन में भी, तो आप देख सकते हैं कि कहां छेड़छाड़ हुई है या नहीं। बदकिस्मती से टोटलाइजर के मामले में यह इतना ट्रांसपेरेंट नहीं होगा। इससे डेमोक्रेसी को क्या बड़ा फायदा होगा?” याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि “ये चुनाव के बाद की हिंसा को रोकने का काम करेगा। यह वोटर्स के फायदे मे होगा। कोई नहीं जान सकता कि मुझे किस बूथ से कितना वोट मिला है। कई देश सिर्फ प्राइवेसी के अधिकार को सुरक्षित रखने, चुनाव के बाद की हिंसा से बचने के लिए टोटलाइजर का इस्तेमाल कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने 2007 में टोटलाइजर का सपोर्ट किया था।”

कैसे काम करता है टोटलाइजर सिस्टम?

याचिकाओं में कहा गया है कि टोटलाइजर सिस्टम से अलग-अलग मतदान केंद्रों पर किस उम्मीदवार को कितने वोट मिले, इसका पता नहीं चलेगा। इससे चुनाव के बाद मतदाताओं को निशाना बनाने, उनके साथ भेदभाव करने और हिंसा की घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है। टोटलाइजर में कई मतदान केंद्रों के वोटों को एक साथ गिनने का प्रावधान होता है। इससे किसी खास बूथ के वोटिंग पैटर्न का पता नहीं चलता।

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Author: vatsalyanews

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