सामंथा रुथ प्रभु अपनी जिंदगी के सबसे अच्छे दौर का मजा ले रही हैं। सामंथा अपने पति राज निदिमोरु के साथ अपने पहले बच्चे का स्वागत करने का इंतजार कर रही हैं। 1 दिसंबर 2025 को एक्ट्रेस सामंथा ने फिल्ममेकर राज से शादी की थी। शादी के छह महीने के अंदर ही सामंथा की प्रेग्नेंसी की अफवाहें शुरू हो गईं। हाल ही में एक इंटरव्यू में सामंथा ने बताया कि यह प्रेग्नेंसी उनके लिए एक सरप्राइज थी। अब सामंथा रुथ प्रभु ने अपने ट्रेडिशनल बेबी शावर की तस्वीरें और वीडियो शेयर की है, जिनमें वह अपने पति के साथ अपनी पारंपरिक गोद भराई की रस्म मनाती हुई नजर आ रही हैं।
सामंथा रुथ प्रभु की गोद भराई की तस्वीरें
सामंथा ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर अपनी पारंपरिक गोद भराई की रस्म के कुछ खूबसूरत पल शेयर किए। इसमें ‘कला आवरण’ (श्री कल्पम), अभिषेक और दूसरी रस्मों जैसी पवित्र रस्में शामिल थीं। कुछ तस्वीरों में सामंथा सरसों के रंग का अनारकली सूट पहने हुए दिखीं। पहले वीडियो में ‘द फैमिली मैन 2’ की एक्ट्रेस पर पवित्र जल डाला जा रहा था और साथ ही मंत्रों का उच्चारण हो रहा था। ये रस्में मां और बच्चे की भलाई के लिए की गई थीं।
सामंथा रुथ ने पारंपरिक तरीके से क्यों की गोद भराई
बाद में सामंथा ने अपनी ड्रेस बदली और पीले रंग की सिल्क की साड़ी पहनी। वीडियो और फोटो के साथ एक्ट्रेस ने उस पारंपरिक आध्यात्मिक समारोह के बारे में बताया, जिसमें वह एक होने वाली मां के तौर पर शामिल हुईं और यह भी बताया कि यह उनके लिए क्यों खास था। सामंथा रुथ प्रभु ने कहा कि वह हमेशा से भारतीय परंपराओं का सम्मान करती आई हैं, भले ही उन्हें हर रस्म का मतलब न पता हो। उनका मानना है कि पुरानी रस्मों, मंत्रों और उनके जाप का गहरा आध्यात्मिक महत्व होता है।
सामंथा की गोद भराई की रस्में क्यों है खास
गोद भराई के दौरान श्रीविद्या परंपरा के एक पुजारी ने सामंथा रुथ प्रभु को हर रस्म का मतलब समझाया। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि हर मंत्र, चढ़ावे और काम का एक खास मकसद होता है। रस्मों में से एक थी ‘कला आवरण’ (श्री कल्पम)। सामंथा रुथ प्रभु के मुताबिक ‘कला आवरण’ श्रीविद्या परंपरा की एक खास रस्म है, जिसमें होने वाली मां के सात चक्रों के जरिए देवी के 94 कलाओं या दिव्य गुणों का सम्मान किया जाता है। इस रस्म के दौरान होने वाली मां के चक्रों को शुद्ध करने, उनमें ऊर्जा भरने और उन्हें आध्यात्मिक आशीर्वाद देने के लिए पवित्र जल और मंत्रों का इस्तेमाल किया गया। सामंथा ने बताया कि इस रस्म की सबसे अच्छी बात यह थी कि इसमें होने वाली मां को देवी का दर्जा दिया जाता है। उन्होंने लिखा:
‘मुझे सबसे ज्यादा इस बात ने प्रभावित किया कि इस रस्म में मां को किस नजरिए से देखा जाता है। उन्हें साक्षात देवी के रूप में सम्मान दिया जाता है, उस पवित्र रचनाकार के रूप में जिसके जरिए एक नई जिंदगी आकार ले रही है। यह उनके अंदर पल रहे बच्चे के लिए भी आशीर्वाद है और उस महिला के लिए भी जो खुद के एक नए रूप में जन्म ले रही है।’
राज निदिमोरु ने पत्नी सामंथा की उतारी नजर
सामंथा ने अपनी पोस्ट में ‘देवी खड्गमाला’ का मतलब भी समझाया। इसमें उन देवी-देवताओं और दिव्य शक्तियों के नाम शामिल हैं, जो इन नौ घेरों से जुड़ी हैं और जिनका जाप किया जाता है। उन्होंने बताया कि माना जाता है कि इस जाप से मां और बच्चे के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बनता है। इससे बच्चे को जन्म से पहले ही एक पवित्र संस्कार मिलता है। एक आध्यात्मिक छाप जो मंत्रों के जरिए बनती है। हालांकि, जिस बात ने इस समारोह को और भी दिल को छू लेने वाला बना दिया। वह राज निदिमोरु की गोद भराई में सामंथा रुथ प्रभु की मौजूदगी थी। एक तस्वीर में राज को सामंथा की ठुड्डी को धीरे से छूते हुए देखा गया। यह एक प्यार भरा अंदाज है, जो अक्सर दक्षिण भारतीय पारंपरिक ‘गोद भराई’ समारोह के दौरान किया जाता है, ताकि होने वाली मां और बच्चे को आशीर्वाद और प्यार मिले। बुरे नजर न लगे।
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