ईरान में बढ़ते आर्थिक संकट से लोगों में गुस्सा भड़क गया है, जिससे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

ईरान में बढ़ते आर्थिक संकट से लोगों में गुस्सा भड़क गया है और देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। ईरान में इस आंदोलन का यह लगातार चौथा दिन है और यह धीरे-धीरे और तेज़ होता जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने कई सड़कें ब्लॉक कर दी हैं, वहीं दूसरी ओर, राजधानी तेहरान के साथ-साथ इस्फ़हान, हमादान और बाबेल जैसे कई शहरों में हज़ारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं और सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के ख़िलाफ़ ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहे हैं। ये प्रदर्शनकारी अब सिर्फ़ सुधारों की नहीं, बल्कि ईरान में पूरी तरह से सत्ता बदलने की मांग कर रहे हैं, जिसे 2022 के महसा अमीनी आंदोलन के बाद सबसे बड़ा विद्रोह माना जा रहा है।

इस आंदोलन के पीछे मुख्य कारण ईरान की बिगड़ती अर्थव्यवस्था और महंगाई है। ईरान में महंगाई दर 42 परसेंट तक पहुँच गई है और लोकल करेंसी ‘रियाल’ डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गई है। 28 दिसंबर को तेहरान के ग्रैंड बाज़ार में दुकानदारों की हड़ताल से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब आम लोगों के गुस्से में बदल गया है। लोग पूर्व शासक रेज़ा शाह पहलवी के समर्थन में भी नारे लगा रहे हैं, जो मौजूदा शासन से उनकी गहरी नाराज़गी दिखाता है।

ईरान में चल रहे इस आंदोलन में प्रदर्शनकारियों का जोश और गुस्सा साफ़ दिख रहा है। इस्फ़हान जैसे बड़े शहरों में लोगों ने ‘डरो मत, हम सब साथ हैं’ और ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए हैं, जिससे पूरा देश हिल गया है। इस आंदोलन में एक नया मोड़ तब आया जब कई शहरों में लोग देश निकाला पाए प्रिंस रेज़ा पहलवी और पूर्व शासक रेज़ा शाह पहलवी के समर्थन में नारे लगाते दिखे, जो मौजूदा शासन से उनकी नाराज़गी दिखाता है।

दूसरी ओर, तेहरान यूनिवर्सिटी की एक पॉपुलर स्टूडेंट लीडर सरीरा करीमी की गिरफ़्तारी के बाद स्टूडेंट्स में गुस्सा है। हमादान और नहवान जैसे शहरों में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सिक्योरिटी फ़ोर्स के आंसू गैस छोड़ने और लाइव एम्युनिशन दागने के बावजूद, जनता मज़बूती से सड़कों पर है और पीछे हटने को तैयार नहीं है।

ईरान में इस आंदोलन को इंटरनेशनल लेवल पर भी सपोर्ट मिल रहा है। अमेरिकी सीनेटर रिक स्कॉट समेत पश्चिमी नेताओं ने ईरानी लोगों की इस हिम्मत की तारीफ़ की है और उन्हें तानाशाही के खिलाफ़ लड़ाई जारी रखने के लिए हिम्मत दी है। ईरान में चल रही यह अशांति आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की राजनीति में एक बड़ा मोड़ ला सकती है।

 

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Author: vatsalyanews

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