सचिन खरवासा में प्रदूषण बहुत ज़्यादा है; किराए की ज़मीन पर केमिकल वाले कपड़ों के पहाड़ बिखरे पड़े हैं

सूरत में सचिन के पास खरवासा ग्राम पंचायत की सीमा में कुछ समय से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां फल-फूल रही हैं। यहां कुछ ज़मीन मालिकों ने ज़्यादा किराया कमाने के लालच में अपनी ज़मीन कबाड़ बेचने वालों को लीज़ पर दे दी है। हालांकि, अब इन ज़मीनों पर ऐसा कचरा डाला जा रहा है जो गांव वालों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

मुख्य समस्या क्या है?

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इन किराए की ज़मीनों पर बड़ी मात्रा में यह खतरनाक कचरा जमा हो रहा है:

केमिकल रैग्स: फैक्ट्रियों से केमिकल वाले रैग्स (लत्ता) के बड़े-बड़े बैग यहां डाले गए हैं।

प्लास्टिक कचरा: नुकसान पहुंचाने वाला प्लास्टिक और स्क्रैप की वह मात्रा जिसे रीसायकल नहीं किया जा सकता।

ज़हरीला प्रदूषण: इस केमिकल वाले कचरे की वजह से आसपास की हवा और मिट्टी में प्रदूषण फैल रहा है। अगर यह केमिकल मानसून के दौरान ज़मीन में चला गया, तो डर है कि ग्राउंडवाटर भी खराब हो जाएगा। “गांव की सीमा में इस तरह से खुलेआम केमिकल कचरा डालना कानूनी जुर्म है। इससे सांस की दिक्कत और स्किन की बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।” – एक परेशान गांव वाला

प्रशासन पर सवाल
ग्राम पंचायत की सीमा में इतनी बड़ी मात्रा में प्रदूषण फैलने के बावजूद, जिम्मेदार अधिकारी अब तक चुप हैं। क्या पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (GPCB) और स्थानीय प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर ध्यान देगा? जब ज़मीन के मालिक सिर्फ़ पैसे के फ़ायदे के लिए लोगों की जान खतरे में डाल रहे हैं, तो लोगों की मांग है कि प्रशासन सख़्त कार्रवाई करे।

अब देखना यह है कि इस रिपोर्ट के बाद प्रशासन जागता है और जांच का आदेश देता है या खरवासा के लोगों को इसी ज़हरीले प्रदूषण के बीच रहना पड़ेगा।

रिपोर्टर कल्पेश धमेलिया कमरेज सूरत

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Author: vatsalyanews

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