रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत से बड़ी खबरें सामने आई हैं। भारत सरकार के मुताबिक, इस युद्ध में रूसी सेना के साथ लड़ने के लिए 200 से ज़्यादा भारतीय नागरिक भर्ती हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को राज्यसभा में पूछे गए सवालों के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, फरवरी 2024 से अब तक कुल 202 भारतीय नागरिक रूसी सेना में शामिल हुए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि इनमें से 119 भारतीयों को समय से पहले छुट्टी देकर वापस लाया गया है।
विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में 26 भारतीय नागरिक मारे गए हैं, जबकि सात लापता हैं। इसके अलावा, सरकार रूसी सेना में सेवारत 50 भारतीयों को जल्द से जल्द रिहा करने के लिए काम कर रही है। 10 मृतक भारतीयों के शवों को वापस लाने की भी कोशिशें चल रही हैं।
विदेश मंत्रालय ने साफ़ किया कि भारत सरकार रूसी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, भलाई और जल्द रिहाई को लेकर रूस के साथ हर लेवल पर बातचीत चल रही है। इसमें दोनों देशों के नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों के बीच बातचीत शामिल है। 18 मरे हुए या लापता भारतीयों के DNA सैंपल रूसी अधिकारियों को मृतकों की पहचान के लिए सौंप दिए गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने सारे भारतीय रूसी सेना में कैसे पहुँचे? युद्ध शुरू होने के बाद से, रूस ने कई देशों में भर्ती अभियान तेज़ कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ने अब तक करीब 128 देशों के विदेशी नागरिकों को भर्ती करने की कोशिश की है। इस युद्ध को अब तक का सबसे खतरनाक संघर्ष माना जाता है। अनुमान है कि इस संघर्ष में 10 लाख से ज़्यादा लोग मारे गए या घायल हुए हैं। अकेले रूस में ही करीब 7 लाख 90 हज़ार लोग मारे गए हैं, जबकि करीब 85 हज़ार सैनिक लापता हैं।
लगभग चार साल लंबे युद्ध में, रूस ने यूक्रेन के करीब 12 प्रतिशत इलाके पर कब्ज़ा कर लिया है और कथित तौर पर पहले कब्ज़ा किए गए क्रीमिया सहित लगभग 20 प्रतिशत इलाके पर उसका कंट्रोल है। भारत सरकार ने फिर कहा है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले रही है और हर भारतीय नागरिक की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करती रहेगी।










