‘जियो-ऑर्बिट से स्ट्रैटेजिक डेटा देने वाला भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट बनेगा EOS-05’, सैटेलाइट की सफल लॉन्चिंग पर बोले ISRO प्रमुख

भारतीय स्पेस एजेंसी ISRO ने शुक्रवार तड़के देश के पहले इमेजिंग सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च करके एक बार फिर इतिहास रच दिया है। GSLV रॉकेट का इस्तेमाल करके 2 हजार 300 किलोग्राम से ज्यादा वजन वाले पेलोड को सटीक कक्षा में स्थापित किया गया। आज का लॉन्च साल 2026 के लिए इसरो की पहली कामयाबी थी, इससे पहले जनवरी में PSLV रॉकेट की उड़ान असफल रही थी। जानें इस सफल लॉन्चिंग पर इसरो प्रमुख ने क्या-क्या कहा।

धरती से 36 हजार किलोमीटर दूर से EOS-05 भेजेगा स्ट्रैटेजिक डेटा

ISRO के वैज्ञानिकों ने बताया कि EOS-05 सैटेलाइट को यहां के स्पेसपोर्ट से लॉन्च होने के करीब 18 मिनट बाद तय सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया। हालांकि, अंतरिक्ष में फिलहाल भारत के 22 उपग्रह  काम कर रहे हैं, जिनमें से सभी अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) से काम करते हैं, लेकिन EOS-5 सैटेलाइट पृथ्वी से लगभग 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर, यानी जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में रहेगा और उस ऊंचाई पर सैटेलाइट पृथ्वी की घूमने की गति के साथ तालमेल बैठाएगा।

GSLV के जरिए अब तक का सबसे भारी सैटेलाइट लॉन्च

जान लें कि 2 हजार 300 किलोग्राम से अधिक वजन वाला यह सैटेलाइट, GSLV के जरिए ले जाया जाने वाला अब तक का सबसे भारी सैटेलाइट है और यह अपने तय रास्ते पर बिल्कुल सही तरह से आगे बढ़ा।

धरती की रियल टाइम तस्वीरें देगा EOS-05 सैटेलाइट

इस सैटेलाइट को “आसमान में मौजूद आंख” (Eye in the sky) कहा जा रहा है क्योंकि इसमें लगे आधुनिक और हाई रेजोल्यूशन कैमरे, हमारी सीमाओं पर संभावित किसी भी हलचल की एक दम साफ और स्टेबल तस्वीरें देंगे, यह सैटेलाइट रियल-टाइम तस्वीरें देगा और खेती व आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी देश की मदद करेगा।

5 मीटर तक की साफ तस्वीरें सेना को देगा EOS-05

आम भाषा में समझें तो इस उपग्रह में एक खास किस्म की दूरबीन भी लगाई गई है जो भारत की सीमाओं पर होने वाली हलचल पर न केवल पैनी नजर रखेगी, बल्कि 5 मीटर तक की साफ-साफ तस्वीरें भी रियल टाइम में फोर्सेस को उपलब्ध करा देंगी। कुछ शुरुआती नाकामियों के बाद इस मिशन की कामयाबी ने निश्चित रूप से सबका हौसला बढ़ाया।

सफल लॉन्च पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दी बधाई

केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी जितेंद्र सिंह ने X पोस्ट में लिखा, ”अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत के लिए एक और बड़ी कामयाबी! GSLV-F17/EOS-05 के सफल लॉन्च के लिए ISRO की टीम को बधाई। EOS-05 एक अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है और जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है। यह विजिबल, इन्फ्रारेड, मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपर-स्पेक्ट्रल बैंड में एडवांस्ड इमेजिंग की सुविधा देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत की अंतरिक्ष क्षमताएं लगातार नई ऊंचाइयां छू रही हैं और एक ग्लोबल स्पेस पावर के तौर पर हमारी स्थिति मजबूत हो रही है।”

जरूर ऑर्बिट में स्थापित किया गया इमेजिंग सैटेलाइट

ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने खुशी-खुशी कहा, “मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि GSLV F-17 व्हीकल ने एडवांस्ड EOS-05 जियो इमेजिंग सैटेलाइट को तय और जरूरी ऑर्बिट में सफलतापूर्वक और सटीक रूप से स्थापित कर दिया है।”

EOS-05 था GSLV का 19वां मिशन

वी. नारायणन ने कहा, “यह श्रीहरिकोटा से 107वां लॉन्च और GSLV का 19वां मिशन है।” उन्होंने याद दिलाया कि GSLV (D1) का पहला लॉन्च 1 हजार 536 किलोग्राम के पेलोड के साथ किया गया था और तब से, ISRO ने धीरे-धीरे स्ट्रक्चरल मास को ऑप्टिमाइज करके और प्रोपल्शन सिस्टम में सुधार करके GSLV की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाया है। आज, हमने इस लॉन्च व्हीकल का इस्तेमाल करके 2 हजार 367 किलोग्राम वजन वाले सबसे भारी सैटेलाइट को लॉन्च किया है।

भारत को अब मिलने लगेगा “स्ट्रैटेजिक डेटा”

इसरो चीफ ने कहा कि एक बार जब EOS-05 ऑर्बिट में काम करना शुरू कर देगा, तो यह जियो-ऑर्बिट से देश के लिए “स्ट्रैटेजिक डेटा” देने वाला भारत का पहला खास इमेजिंग सैटेलाइट बन जाएगा।

EOS-05 की सफल लॉन्चिंग को बताया सफल उपलब्धि

सैटेलाइट डेटा का हवाला देते हुए, वी. नारायणन ने पुष्टि की कि सभी सिस्टम ठीक से काम कर रहे हैं और सोलर पैनल को सफलतापूर्वक तैनात कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “सैटेलाइट की स्थिति बिल्कुल ठीक है। यह हमारे देश के स्पेस प्रोग्राम के लिए एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि यह पहला EOS है जिसे राष्ट्रीय गतिविधियों के लिए जियो-प्लेटफॉर्म पर स्थापित किया जा रहा है।”

जियो-प्लेटफॉर्म पर स्थापित किया जाएगा EOS-05

इसरो चीफ ने कहा कि आने वाले दिनों में ऑर्बिट बढ़ाने की प्रक्रिया की जाएगी और सैटेलाइट को जरूरी ऑर्बिट तक ले जाकर जियो-प्लेटफॉर्म पर स्थापित किया जाएगा।

ये भी पढ़ें- भारत ने अंतरिक्ष में भेजी सबसे ताकतवर ‘आंख’, ISRO ने लॉन्च किया GSLV-F17 मिशन, इसका मकसद क्या है?

vatsalyanews
Author: vatsalyanews

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!