जामनगर में ज़रूरतमंदों के लिए निस्वार्थ सेवा

महंत देवप्रसादजी अपने राज के पचास साल पूरे करेंगे
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श्री अंदबावा सेवा संस्था-जामनगर लगातार काम कर रही है और बुजुर्गों के आराम घर की सुविधाएं बढ़ाई गई हैं

महंत का जल संरक्षण, गर्भ संस्कार और अच्छे समाज के निर्माण समेत भागीरथी कामों को निस्वार्थ भाव से करने का वादा

जामनगर (भारत भोगायत)

जामनगर की मशहूर सेवा संस्था श्री अंदबावा सेवा संस्था के गादीपति महंत देवप्रसादजी अपने राज के पचास साल पूरे करेंगे। इस दौरान लगातार सेवा के साथ-साथ स्कूल, बच्चों के आश्रम, गौशाला, संस्कृत स्कूल, मंदिर और अस्पतालों की सुविधाएं भी लगातार बढ़ाई जाएंगी। महंत के विश्राम करते समय आने वाले दिनों में जल संरक्षण कार्यों व जागरूकता बढ़ाने तथा गर्भावस्था के दौरान संस्कार देने के अलावा एक अच्छे समाज के विकास के लिए महंत देवप्रसादजी ने जामनगर में एक पत्रकार वार्ता के दौरान सभी जीवों के कल्याण हेतु निस्वार्थ सेवा के कार्य को लेकर अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की और एक विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि सेवा को ही सेवा कहते हैं। इसलिए इस संस्था में विभिन्न पहलुओं से सेवाओं का त्याग दशकों से, बल्कि एक सदी से भी अधिक समय से निर्बाध रूप से जारी है और संस्था के प्रति लोगों का सम्मान भी बढ़ रहा है। सामूहिक विवाह, नेत्र अस्पताल, किडनी डायलिसिस केंद्र, संस्कृत विद्यालय, बच्चों और बुजुर्गों के लिए आश्रम, स्कूल, वैकल्पिक चिकित्सा केंद्र, प्राकृतिक खेती केंद्र, श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर सहित चालीस से अधिक विभिन्न प्रकल्प इस संस्था द्वारा क्रियान्वित किए जा रहे हैं।

श्री अंदबावा सेवा संस्था के प. महंतश्री देवप्रसादजी महाराजश्री, श्री अंदाबावा महिला वृद्धाश्रम की स्थापना 16-11-1977 को हुई थी और इस संस्था को अब तक 556 माताओं की सेवा करने का मौका मिला है। अभी संस्था में 60 से 92 साल की तीस से ज़्यादा माताएँ रह रही हैं, जिनके रहने, खाने, दवा, कपड़े वगैरह की पूरी ज़िम्मेदारी संस्था की तरफ़ से दी जाती है। इस वृद्धाश्रम में माताओं को अटैच्ड बाथरूम और टॉयलेट की अच्छी सुविधाएँ मिलती हैं। 24 कमरे हैं, जिनमें एक कमरे में दो माताएँ रह सकती हैं। (कुल 48 माताएँ रह सकती हैं।) साथ ही, कमरों में लिफ्ट की सुविधा, टेलीविज़न, एयर कंडीशनिंग और इंटरकॉम की सुविधा, मेडिकल रूम का इंतज़ाम, कैंपस में संतों के लिए एक हॉल और मंदिर, उसी बिल्डिंग में एक कैफेटेरिया का इंतज़ाम, फायर सेफ्टी और कैमरे वगैरह सुविधाएँ हैं और इसे आज के समय में आने वाली माताओं की शारीरिक क्षमता को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसीलिए वृद्धाश्रम का नाम “रेस्ट होम” रखा गया है। कांगो निवासी केतनभाई और दीप्तिबेन और कोटेचा परिवार ने अपनी मां कुमुदबेन रमणिकलाल कोटेचा की याद में इस सेवा प्रोजेक्ट को स्वीकार किया है। जो चालू हो जाएगा।

इसके साथ ही इस रेस्ट होम को दूसरे बुजुर्गों के मिलने, पढ़ने और विचारों के आदान-प्रदान का सेंटर बनाने के लिए सुविधाएं भी बढ़ाई जाएंगी। बारिश के पानी को समुद्र में जाने से रोकने और जहां पानी जमा हो रहा है, वहां पानी का स्टोरेज बढ़ाने के अलावा, ज़्यादा से ज़्यादा हेल्दी समाज बनाने के लिए गर्भवती महिलाओं के लिए शास्त्र-सम्मत शिक्षा और मार्गदर्शन और गर्भ संस्कार सेंटर जैसे प्रोजेक्ट भी शुरू किए जाएंगे।

गौरतलब है कि पचास साल से गद्दी पर बैठे और संस्था को रोशन करने वाले महंत देवप्रसादजी ने अपनी अनवरत सेवा से देश-विदेश में नाम कमाया है और उनके मार्गदर्शन में कई परिवारों की जीवन यात्रा सार्थक हुई है।

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Author: vatsalyanews

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