वडोदरा जिले के पांच BJP MLA केतन इनामदार, अक्षय पटेल, शैलेश सोट्टा, चैतन्यसिंह झाला और धर्मेंद्रसिंह वाघेला ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को चिट्ठी लिखकर अधिकारियों के निकम्मे एडमिनिस्ट्रेशन के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया है।
वडोदरा जिले के डभोई से MLA शैलेश सोट्टा, सावली से MLA केतन इनामदार, वाघोडिया से MLA धर्मेंद्रसिंह वाघेला, कर्जन से अक्षय पटेल और पादरा से चैतन्यसिंह झाला ने मिलकर मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर जिले की असली हालत बताई है। दूसरी तरफ, यह सवाल भी पूछा जा रहा है कि अधिकारी किसका काम नहीं कर रहे हैं, जनता या नेता?
MLAs ने गुस्से में लिखा है, ‘फिलहाल राज्य में एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम की हालत खराब हो गई है। ऐसा लगता है कि जनता का काम इस सिस्टम के कानों तक नहीं पहुंचता। एक आम आदमी के लिए सरकारी ऑफिस से अपना छोटा सा काम करवाना जंग लड़ने जैसा हो गया है। राज्य के सभी बड़े अधिकारियों से लेकर सभी छोटे कर्मचारी अपनी बुरी मनमानी दिखा रहे हैं। अधिकारियों (कलेक्टर, डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट ऑफिसर, सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस, पुलिस कमिश्नर वगैरह) ने अपनी पसंद का एक अच्छा ऑफिस बना लिया है और सरकारी सेक्रेटरी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए ज़मीनी हकीकत, लोगों की समस्याओं, भौगोलिक स्थिति को जाने बिना ही अच्छी-अच्छी तस्वीर दिखाते हैं, सरकार को सच्चाई से दूर रखा जा रहा है।’
‘खुद को लोगों और लोगों के प्रतिनिधियों से ऊपर सरकार मानकर अंधाधुंध एडमिनिस्ट्रेशन चलाया जा रहा है, जिससे सरकार की इमेज खराब हो रही है। MLA के बताए काम नहीं हो रहे हैं, ऊपर से अधिकारी लोगों से कह रहे हैं कि तुमने MLA की मदद क्यों ली? ऐसी बुरी सोच एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम को ठीक से चलाने के लिए ठीक नहीं है।’
वडोदरा जिले के MLA पहले भी ऐसी ज़ुबानी बात कह चुके हैं और अब गुज़ारिश कर रहे हैं कि मनमानी करने वाले अफ़सरों को साफ़ निर्देश दिए जाएं कि लोगों के नुमाइंदों के सुझाए गए कामों को प्राथमिकता दी जाए – लोगों के फ़ायदे में फ़ैसले लिए जाएं और उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाए। वडोदरा जिले के पांच MLA ने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर मिलकर शिकायत की है कि ज़िले के सरकारी अफ़सर अपना काम नहीं कर रहे हैं, और इससे BJP में हंगामा शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में जब ज़िला पंचायत और निगम की तालुका पंचायत के चुनाव होने वाले हैं, तो MLAs के ये बागी सुर BJP के लिए चिंता की बात बन गए हैं।










