रिपोर्ट – भारत ठाकोर भीलडी
डिसा तालुका के वहरा गांव में समाज सुधार की दिशा में एक अहम और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। जोगमाया माताजी के पवित्र मंदिर में गांव के नेताओं, बुजुर्गों और युवाओं की मिली-जुली मौजूदगी में समाज के संविधान को लागू करने के लिए एक खास मीटिंग हुई। इस मीटिंग में, समाज को पीछे धकेलने वाले 17 मूलदास/कुरिवजाओं पर पूरी तरह से बैन लगाने का फैसला एकमत से लिया गया। खासकर शादियों और दूसरे सामाजिक मौकों पर शराब और DJ साउंड पर पूरी तरह से बैन लगाने का सख्त फैसला लिया गया है। जैसा कि मीटिंग में बताया गया, शादियों के मौकों पर फालतू खर्च, दिखावे और शोर-शराबे की वजह से समाज में बेचैनी बढ़ रही थी, जिसे दूर करने के लिए यह संविधान लागू किया गया है। अब शादियों के मौकों पर सिर्फ सिंपल शरणाई या पारंपरिक दो सुर वाली धुनों को ही सीमित रखने के लिए साफ गाइडलाइंस जारी की गई हैं।
समाज के नेताओं ने कहा कि इस फैसले का मुख्य मकसद युवा पीढ़ी को नशा-मुक्त, संस्कारी और पढ़ाई-लिखाई के प्रति मोटिवेट करना है। साथ ही, सभी से संविधान का पालन करने की अपील की गई ताकि सामाजिक एकता मजबूत हो और समाज में शांति और व्यवस्था बनी रहे। मीटिंग के आखिर में सभी मौजूद लोगों ने सामाजिक संविधान का पालन करने का संकल्प लिया। इस मौके पर बड़ी संख्या में गांव के बुजुर्ग, युवा और समाज के प्रतिनिधि मौजूद थे। वहरा गांव का यह फैसला आज के समय में समाज के लिए प्रेरणा बन रहा है।









