तारीख: 18-02-2026
रिपोर्ट: यश मांकड़, प्रतीक जोशी
मुंद्रा के कंडागरा गांव में MPL कॉलोनी में रात 10 बजे एक मज़दूर ने सुसाइड कर लिया, जिसके बारे में पूरे मामले की जांच करने गई पुलिस टीम मज़दूरों के गुस्से का शिकार हो गई। मज़दूर के शव को घरवालों के आने से पहले न ले जाने की वजह से पूरी घटना हिंसक हो गई। घटना की जांच कर रहे पुलिस स्टेशन पर मज़दूरों ने पथराव किया। एक प्राइवेट गाड़ी में भी आग लगा दी गई। हालात काबू से बाहर होते ही पूरे जिले में पुलिस काफिले में हंगामा मच गया। पुलिस ने तलाशी ली और करीब 33 बागी मज़दूरों को पकड़ लिया। कंडागरा के पास एक लेबर कॉलोनी में रहने वाले 30 साल के नीरज मेहता नाम के युवक ने अपने कमरे में सुसाइड कर लिया, जिसके बाद काफी बहस हुई। जब मुंद्रा पुलिस को इस बारे में पता चला, तो पूरा काफिला जांच करने के लिए दौड़ पड़ा। जब बॉडी को सरकारी अस्पताल ले जाने का काम चल रहा था, तो आस-पास रहने वाले दूसरे मज़दूर इकट्ठा हो गए और मृतक के परिवार के आने तक बॉडी को पोस्टमॉर्टम के लिए न ले जाने का विरोध करने लगे। मज़दूरों के पुलिस के कानूनी काम में दखल देने से मामला गरमा गया। मज़दूरों का भारी गुस्सा देखकर पुलिस फोर्स आखिरकार कमजोर पड़ गई और वापस जाते समय मज़दूरों ने एक सरकारी गाड़ी और एक क्रेटा कार पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। जान हथेली पर लेकर पुलिस को पतली गली ले जाना पड़ा। पत्थरबाजी के बाद भी संतुष्ट न होने वाले मज़दूरों ने एक प्राइवेट क्रेटा गाड़ी भी जला दी थी। जब हालात काबू से बाहर हो गए, तो LCB, भुज A, B डिवीजन और SOG, मांडवी, प्रागपर समेत पुलिस स्टाफ को तैनात किया गया। पूरी घटना को कवर करने गए पत्रकारों को भी अडानी कंपनी के कॉलोनी मैनेजर और पुलिस के बीच सांठगांठ का बहाना बनाकर रोका गया। तनावपूर्ण स्थिति पर काबू पाने के बाद भी मुंद्रा पुलिस की चुप्पी एक रहस्यमयी इशारा दिखाती है। मुंद्रा पुलिस ने अडानी कंपनी की सिक्योरिटी को ढाल बनाकर पत्रकारों को रोका था। कुछ समय पहले कॉलोनी के मज़दूरों द्वारा किसी छोटी सी बात पर सिक्योरिटी केबिन पर पथराव करने की घटना भी लोगों की चर्चा में आई थी। ऐसी घटनाएं बार-बार हुईं और स्थानीय लोगों में डर का माहौल बन गया। चूंकि पुलिस और कंपनी द्वारा नियुक्त कॉलोनी मैनेजर ने पूरे मामले पर कोई सफाई नहीं दी है, इसलिए लोगों में इस बात की चर्चा है कि दाल में कुछ काला है।







