हलोल के एरल गांव के अप्सा मंसूरी, हुसैन मंसूरी और मनहबा ने अपनी ज़िंदगी का पहला रोज़ा रखा और खुदा की इबादत की।

रिपोर्टर. कादिर बियर्ड. हलोल

तारीख 22.2.2026

पूरी दुनिया में रमज़ान शुरू होते ही मुस्लिम भाई-बहन इबादत में डूब गए हैं। हलोल शहर में बड़ों के साथ-साथ छोटे बच्चे भी रमज़ान के महीने में रोज़ा रख रहे हैं और खुदा की इबादत कर रहे हैं। इनमें हलोल शहर के कोठी फलिया में रहने वाली पांच साल की अप्सा इमरान मसूरी, छह साल के हसनैन इरफान मंसूरी और एरल गांव में रहने वाली सात साल की मनहबानु वसीमभाई ने रमज़ान के महीने का पहला रोज़ा रखा। उन्होंने भूखे-प्यासे होने के बावजूद 13 घंटे तक मासूमियत और मासूमियत से अल्लाह की इबादत की और अपनी भाषा में हाथ उठाकर दुआ मांगी। रमज़ान के पवित्र महीने में मुस्लिम भाई-बहन एक महीने तक रोज़ा रखकर अल्लाह की इबादत कर रहे हैं। इन सभी छोटे बच्चों ने 13 घंटे तक रोज़ा रखा, उन्होंने लंबे समय तक भूख और प्यास सहे, पूरे दिन अल्लाह की इबादत और दुआ की, और रमज़ान के महीने में अपनी ज़िंदगी का पहला रोज़ा रखा। उनके परिवार समेत सभी ने इन छोटे बच्चों को फूल देकर बधाई दी और उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।

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Author: vatsalyanews

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