राज्य मंत्री त्रिकमभाई छंगा की अध्यक्षता में गांधीधाम में ‘मिलेट फेस्टिवल’ और ‘प्राकृतिक किसान बाज़ार’ का उद्घाटन किया गया।

वात्सल्यम समाचार।

रिपोर्ट:- रमेश माहेश्वरी – गांधीधाम कच्छ।

गांधीधाम, 21 मार्च: प्राकृतिक खेती और बाजरा लोगों के स्वास्थ्य और प्रकृति, दोनों के लिए फायदेमंद हैं – राज्य मंत्री त्रिकमभाई छांगा।

आज गांधीधाम में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री त्रिकमभाई छांगा की अध्यक्षता में ‘बाजरा महोत्सव’ और ‘प्राकृतिक किसान बाज़ार’ का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर राज्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी और मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल की प्रेरणा से प्राकृतिक खेती के लिए एक अभियान शुरू किया गया है। राज्य के लाखों किसान इस प्राकृतिक खेती अभियान से जुड़ चुके हैं। सरकार भी विभिन्न योजनाएं लागू कर रही है और किसानों को प्रशिक्षण तथा अन्य सहायता प्रदान कर रही है, ताकि उन्हें बाज़ार और मदद मिल सके। आज के समय में, जब कीटनाशकों के उपयोग से उत्पादित कृषि उत्पाद नागरिकों के स्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं, तब प्राकृतिक खेती ही लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा का एकमात्र समाधान है। इसके साथ ही, पारंपरिक बाजरे की लोकप्रियता भी पूरी दुनिया में काफी बढ़ गई है और प्रधानमंत्री भी इसके उपयोग पर ज़ोर दे रहे हैं; इसलिए अच्छे स्वास्थ्य के लिए हमारे दैनिक जीवन में बाजरे को उचित स्थान देना आवश्यक है। इस अवसर पर, मंत्री ने किसानों को प्राकृतिक उत्पादों में ‘वैल्यू-एडिशन’ (मूल्य संवर्धन) करके उन्हें बेचने के लिए भी प्रोत्साहित किया। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में कच्छ का सर्वांगीण विकास हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान में कच्छ में ‘रिवर्स माइग्रेशन’ (उल्टा पलायन) हो रहा है और भविष्य में कच्छ और भी अधिक समृद्ध बनेगा। उन्होंने नागरिकों से ‘श्री अन्न’ (बाजरा) को प्राथमिकता देने और किसानों से प्राकृतिक खेती को अधिक से अधिक अपनाने की अपील की। ​​इस अवसर पर विधायक मालतीबेन माहेश्वरी ने कहा कि जहां केंद्र और राज्य सरकारें प्राकृतिक खेती और बाजरे के उपयोग को बढ़ावा दे रही हैं, वहीं नागरिकों को भी अच्छे स्वास्थ्य के लिए जागरूकता के साथ इसका उपयोग बढ़ाना चाहिए। भोजन स्वास्थ्य और प्रकृति, दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है; चूंकि इसमें सभी प्रकार के पोषक तत्व मौजूद होते हैं, इसलिए आज यह आर्थिक रूप से संपन्न लोगों के जीवन में भी अपनी जगह बना चुका है। इस अवसर पर, उन्होंने कीटनाशकों और उर्वरकों के उपयोग से दूर रहकर प्राकृतिक खेती अपनाने पर ज़ोर दिया और किसानों से आने वाली पीढ़ी की चिंता करते हुए प्राकृतिक खेती की ओर मुड़ने की अपील की। इस अवसर पर, उपस्थित लोगों द्वारा लाभार्थी किसानों को आर्थिक सहायता के चेक वितरित किए गए। यह उल्लेखनीय है कि इस दो-दिवसीय उत्सव में, नागरिक प्राकृतिक खेती में लगे किसानों के विभिन्न स्टॉलों के साथ-साथ बाजरा सहित जैविक उत्पाद बनाने वाले ‘सखी मंडलों’ से भी लाभान्वित हो सकेंगे। इस अवसर पर गांधीधाम के नगर आयुक्त मनीष गुरुवानी, उप नगर आयुक्त मेहुल देसाई, DRDA के निदेशक निकुंज पारिख, जिला कृषि अधिकारी के. वाघेला, उप कृषि निदेशक पी.के. पटेल, संभागीय अनुसंधान केंद्र भचाऊ के वैज्ञानिक राजदीपसिंह जडेजा, नेता तेजस सेठ तथा बड़ी संख्या में किसान और नागरिक उपस्थित थे।

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Author: vatsalyanews

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