किसानों की 11 मांगों को लेकर AAP के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की

इसुदान गढ़वी, गोपाल इटालिया, चैतर वसावा और मनोज सोरठिया सहित नेताओं ने गांधीनगर में मुख्यमंत्री से मुलाकात की

AAP के प्रतिनिधिमंडल ने किसानों के 11 मुद्दे मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किए

गुजरात के किसानों की 11 मांगों के साथ प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी के नेतृत्व में AAP के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की: गोपाल इटालिया

कडदा प्रथा समाप्त की जाए, हडदड कांड और साबर डेयरी आंदोलन में किसानों पर दर्ज मामलों को वापस लिया जाए, किसानों को पंजाब की AAP सरकार की तरह प्रति हेक्टेयर ₹50,000 का मुआवजा दिया जाए—ऐसी कुल 11 मांगें मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की गईं: गोपाल इटालिया

पूरे गुजरात के किसान आम आदमी पार्टी की ओर आशा भरी नजरों से देख रहे हैं: गोपाल इटालिया

पंजाब की तरह गुजरात सरकार भी किसानों, भागीदार किसान और खेत मजदूरों को मुआवजा दे: गोपाल इटालिया

आशा है कि मुख्यमंत्री किसानों के 11 मुद्दों पर शीघ्र निर्णय लेकर खेती और किसानों के लिए कुछ अच्छा करेंगे: गोपाल इटालिया

कडदा प्रथा से लेकर अन्य कई मुद्दों पर AAP ने पूरे गुजरात में किसान महापंचायतें कीं: गोपाल इटालिया

हम आपके सामने गुजरात के किसानों की ये 11 मांगें पेश करते हैं। ये मांगें राजनीतिक नहीं हैं, बल्कि राज्य की खेती और किसानों को ज़िंदा रखने की मांग हैं:

(1) गुजरात के सभी कृषि मंडियों से ‘कडदा प्रथाओं’ को तुरंत बंद किया जाना चाहिए और ऐसा करने वालों को जेल में डाल दिया जाना चाहिए।

(2) ऐसी व्यवस्था करें कि किसानों को अपनी फसल ए.पी.एम.सी. मंडी के अलावा अन्य गोदामों या फैक्ट्रियों में पहुंचाने के लिए मजबूर न होना पड़े।

(3) पंजाब सरकार के अनुसार राज्य भर में झुलसा रोग से प्रभावित हर फसल के किसानों/शेयरधारकों को प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये का मुआवजा देने और एक महीने के अंदर भुगतान करने का प्रावधान किया जाना चाहिए।

(4) सभी यूनियनों में मूल्य परिवर्तन का भुगतान डेयरियों में दूध भरने वाले पशुपालकों के खाते में सीधा किया जाए तथा समय पर भुगतान किया जाए।

(5) किसानों को 12 घंटे मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

(6) हद्दाद व साबर डेयरी आंदोलन में किसानों पर दर्ज पुलिस मामले वापस लिए जाएं तथा जेल में बंद किसानों को तुरंत रिहा किया जाए।

(7) सभी फसलों को सरकार द्वारा एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर खरीदा जाना चाहिए।

(8) किसानों को उर्वरक पर्याप्त मात्रा में और समय पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

(9) चीनी मिलों का बकाया पैसा गन्ना किसानों को दिया जाए तथा बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनः चालू किया जाए।

(10) सी.सी.आई. द्वारा कपास की खरीद हर साल दिसंबर के बजाय 1 अक्टूबर से शुरू होनी चाहिए।

(11) विभिन्न कम्पनियों की बिजली ग्रिड लाइनें जो जबरदस्ती किसानों की जमीन पर नहीं बिछाई गई हैं, उनका उचित मुआवजा किसानों को दिया जाए।

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Author: vatsalyanews

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