ग्लोबल टेंशन और FIIs की बिकवाली के बीच शेयर मार्केट में डर का माहौल है..!!!

FIIs की भारी बिकवाली, मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल टेंशन और ग्लोबल कमजोरी के बीच मार्केट में गिरावट जारी रही। हफ्ते के आखिर में गुरुवार का दिन इंडियन स्टॉक मार्केट के लिए ‘ब्लैक थर्सडे’ साबित हुआ। डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ जंग भड़काने वाला बयान देते हुए कहा कि हम ईरान को अगले 2-3 हफ्तों तक हिलाकर रख देंगे और उसे वापस स्टोन एज में धकेल देंगे… उनके इस बयान से ग्लोबल मार्केट में एक बार फिर हलचल मच गई, जिसका असर इंडियन स्टॉक मार्केट पर भी पड़ा। दूसरी ओर, नेगेटिव संकेतों और मिडिल ईस्ट में बढ़ते टेंशन की वजह से डोमेस्टिक मार्केट में प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिली, जिसकी वजह से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट आई है। प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, “जंग दो से तीन हफ्तों में खत्म हो जाएगी,” लेकिन उनकी ज्यादातर बातें जंग के निर्णायक अंत की ओर इशारा करने के बजाय कन्फ्यूजिंग ज्यादा लग रही हैं। यही वजह है कि इंटरनेशनल मार्केट में तेल की कीमतें फिर से बढ़ रही हैं, जो इंडियन इकोनॉमी के लिए चिंता की बात है। इस हफ्ते इंडियन स्टॉक मार्केट में हर बढ़त के बाद लगातार मंदी का ट्रेंड देखा गया, जिसमें ज्यादातर ट्रेडिंग सेशन में बिकवाली हावी रही। मार्केट में हर रिकवरी पर गैप डाउन और बिकवाली देखी गई, जो साफ तौर पर कमजोर सेंटिमेंट की ओर इशारा करता है। लार्जकैप स्टॉक्स में गिरावट दर्ज होने से बड़े इंडेक्स पर दबाव बढ़ा, जबकि मार्केट के अंदर कमजोरी साफ दिखी क्योंकि मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में ज्यादा बुलिश बिकवाली दर्ज की गई। इन्वेस्टर रिस्क से दूर रहे और “रिस्क ऑफ” अप्रोच अपनाते दिखे। हफ्ते की शुरुआत ग्लोबल नेगेटिव सिग्नल और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ हुई, जिससे मार्केट शुरू से ही दबाव में रहा। मिड-सेशन में कुछ कंसोलिडेशन हुआ, लेकिन कोई रिकवरी नहीं हुई और बिकवाली फिर से बढ़ती देखी गई। हफ्ते के आखिरी सेशन में भी मार्केट में काफी उतार-चढ़ाव के साथ ट्रेड हो रहा था, लेकिन दोस्तों, मंदी का ट्रेंड अभी भी बरकरार है और खरीदार सतर्क रुख अपना रहे हैं। गिरावट के मुख्य कारण:- मार्केट में मंदी बने रहने का मुख्य कारण ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल टेंशन है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जिससे इन्वेस्टर्स में अनिश्चितता बढ़ती देखी गई है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी मार्केट के लिए सबसे बड़ा नेगेटिव फैक्टर रही है। क्योंकि भारत एक बड़ा तेल इंपोर्टर है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई और करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ने का डर है। विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की लगातार बिकवाली से मार्केट ऊंचाई से टूट रहा है। ग्लोबल रिस्क को ध्यान में रखते हुए, वे भारतीय मार्केट से पैसा निकालते दिखे हैं। ग्लोबल मार्केट में कमजोरी भी भारतीय मार्केट के लिए नेगेटिव साबित हुई है, क्योंकि भारतीय मार्केट ग्लोबल ट्रेंड से जुड़ा हुआ है। तेजी के लिए लिमिटिंग फैक्टर्स हालांकि पूरे हफ्ते कमजोरी देखी गई, लेकिन कुछ डिफेंसिव सेक्टर्स में लिमिटेड खरीदारी देखी गई। इन्वेस्टर्स ने FMCG और फार्मा सेक्टर्स को सेफ इन्वेस्टमेंट के तौर पर पसंद किया, जिससे इन सेक्टर्स में गिरावट लिमिटेड रही। घरेलू इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की खरीदारी ने मार्केट को और गहरी गिरावट से बचाने में मदद की। दोस्तों, ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल टेंशन और युद्ध के हालात मार्केट के लिए सबसे बड़ा रिस्क हैं। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से भारत के लिए महंगाई और इकोनॉमिक प्रेशर बढ़ने की संभावना है। FIIs की भारी बिकवाली से मार्केट का ट्रेंड कमजोर हो रहा है। ग्लोबल लेवल पर बढ़ती महंगाई और इंटरेस्ट रेट्स को लेकर अनिश्चितता इन्वेस्टर्स के कॉन्फिडेंस पर असर डाल रही है। ग्लोबल फैक्टर्स:- यह नेगेटिव सिग्नल ऐसे समय में आया है जब US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान वॉर को लेकर देश को एड्रेस किया है। ट्रंप के बयानों से इन्वेस्टर्स में अनसर्टेनिटी बढ़ गई है, जिससे मार्केट में पैनिक है। ग्लोबल लेवल पर, मिडिल ईस्ट में बढ़ता टेंशन और वॉर का डर मार्केट के लिए सबसे बड़ा रिस्क बन रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के कड़े बयान और ईरान के साथ बढ़ते टेंशन से मार्केट सेंटिमेंट पर असर पड़ रहा है। एनर्जी सप्लाई में रुकावट और स्ट्रेटेजिक रूट्स को खतरे की वजह से क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ रही हैं। बढ़ती महंगाई की आशंका और ग्लोबल इकॉनमी के रिसेशन की ओर बढ़ने के संकेतों से इन्वेस्टर्स सावधान हो रहे हैं। सेक्टर-वाइज मूवमेंट बैंकिंग सेक्टर में भारी सेलिंग देखी गई, जो मार्केट में गिरावट की मेन वजह रही। ग्लोबल डिमांड को लेकर चिंताओं की वजह से IT सेक्टर पर प्रेशर रहा। ग्लोबल डिमांड में कमजोरी की वजह से मेटल सेक्टर में गिरावट आई। ऑटो सेक्टर में मिला-जुला लेकिन कमजोर ट्रेंड देखा गया। FMCG और फार्मा सेक्टर में लिमिटेड स्टेबिलिटी देखी गई। कमोडिटी मार्केट इस हफ्ते कमोडिटी मार्केट में भारी वोलैटिलिटी देखी गई। क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी मार्केट के लिए नेगेटिव रही। सोने में शुरू में सेफ़ इन्वेस्टमेंट के तौर पर तेज़ी देखी गई, लेकिन आखिर में इसमें उतार-चढ़ाव आया। चांदी में भी बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव देखा गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया पर कीमतों में बड़े बदलाव हुए। बेस मेटल कमज़ोर थे। मार्केट की आगे की दिशा अभी के हालात में, इन्वेस्टर्स को बहुत सावधान रहने की ज़रूरत है। मज़बूत फंडामेंटल्स वाले स्टॉक्स में धीरे-धीरे इन्वेस्ट करना सही रहेगा। शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए स्टॉप-लॉस बहुत ज़रूरी है। वोलैटिलिटी के दौरान “कैपिटल प्रोटेक्शन” पर ध्यान देना चाहिए। आने वाले हफ़्तों में मार्केट में वोलैटिलिटी वैसी ही रहने की उम्मीद है। ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल हालात, कच्चे तेल की कीमतें और FII एक्टिविटीज़ मार्केट के लिए मुख्य ट्रिगर होंगी। अगर ग्लोबल टेंशन कम होती है, तो मार्केट में रिकवरी हो सकती है, लेकिन अभी के लिए, शॉर्ट टर्म में मंदी का ट्रेंड जारी रहने की ज़्यादा संभावना है। ग्लोबल फैक्टर्स, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और FII की बिकवाली मार्केट पर दबाव डाल रही हैं। इन्वेस्टर्स को इस हालात में सावधानी से इन्वेस्ट करने और लॉन्ग-टर्म नज़रिए से सिर्फ़ मज़बूत स्टॉक्स पर फोकस करने की ज़रूरत है। The securities quoted are for illustration only and are not recommendatory. Investment in securities market are subject to market risks. Read and agree Disclaimer and related all the documents carefully before investing, mentioned on www.nikhilbhatt.in  

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