मेडिकल और डेंटल एजुकेशन में नियमों के उल्लंघन पर सुप्रीम कोर्ट ने आंखें मूंद ली हैं। राजस्थान के 10 प्राइवेट डेंटल कॉलेजों द्वारा NEET नियमों के आधार पर एडमिशन दिए जाने के मामले में कोर्ट ने हर कॉलेज पर 10 करोड़ रुपये (कुल 100 करोड़ रुपये) का भारी जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि एजुकेशन के लेवल से कोई समझौता नहीं होने दिया जाएगा।
इस ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि कॉलेजों से वसूले गए 100 करोड़ रुपये के जुर्माने की रकम ‘राजस्थान स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी’ के पास जमा की जाएगी, जिसे फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा किया जाएगा और इससे मिलने वाले ब्याज का इस्तेमाल ओल्ड एज होम, नारी निकेतन, वन स्टॉप सेंटर और चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन के रखरखाव और सुधार के लिए किया जाएगा। इसने इन पैसों के सही इस्तेमाल पर नजर रखने के लिए राजस्थान हाई कोर्ट की 5 जजों की कमेटी बनाने का भी आदेश दिया है।
दूसरी तरफ, कोर्ट ने आर्टिकल 142 के तहत खास अधिकारों का इस्तेमाल करके पढ़ाई पूरी कर चुके स्टूडेंट्स की डिग्री को मान्यता तो दे दी है, लेकिन यह शर्त भी रखी है कि इन स्टूडेंट्स को आपदा या महामारी जैसी इमरजेंसी के समय राज्य सरकार को मुफ्त सेवाएं देने की शपथ लेनी होगी। हालांकि, कोर्ट ने एडमिशन के 9 साल बाद भी BDS पूरा न करने वाले स्टूडेंट्स को बिना कोई राहत दिए तुरंत कोर्स से निकालने का सख्त आदेश भी दिया है।
मेडिकल एजुकेशन के गिरते स्टैंडर्ड पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह के गैर-कानूनी एडमिशन भविष्य के डॉक्टरों की क्वालिटी पर सवाल उठाते हैं। यह फैसला उन सभी इंस्टीट्यूशन्स के लिए चेतावनी है जो नियम तोड़कर एडमिशन देते हैं।










