वात्सल्यम समाचार.
रिपोर्ट:- रमेश माहेश्वरी – भुज कच्छ.
भुज, ता – 28 फरवरी: राज्य सरकार ने जल्द ही 14 साल की लड़कियों के लिए एंटी-कैंसर HPV वैक्सीन शुरू करने का ऐलान किया है, लेकिन इस कैंपेन को सफल बनाने से पहले, बेसिक हेल्थ वर्कर्स ने सरकार के सामने अपनी वाजिब मांगें और कुछ गंभीर दुविधाएं रखी हैं। हेल्थ डिपार्टमेंट के जानकारों से मिली जानकारी के मुताबिक, किसी भी वैक्सीनेशन कैंपेन में फील्ड वर्कर्स ही जनता और सरकार के बीच की मुख्य कड़ी होते हैं, लेकिन कोरोना काल के कड़वे अनुभवों के बाद कर्मचारियों में कुछ शक पैदा हो रहे हैं।
HPV वैक्सीन सिर्फ क्वालिफाइड डॉक्टर की मौजूदगी में और माता-पिता की लिखित सहमति से ही देने का नियम है, जिससे जनता में वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स को लेकर शक पैदा हो सकता है। कर्मचारियों का कहना है कि अगर कोई बुरा असर होता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी किसकी होगी? कोरोना वैक्सीनेशन के दौरान बिना देखे दिन-रात काम करने वाले कर्मचारियों को बाद में लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा, ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए सरकार के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि वह वैक्सीन की सुरक्षा पर साइंटिफिक क्लैरिटी दे और कर्मचारियों को एडमिनिस्ट्रेटिव सुरक्षा दे। दूसरी तरफ, सालों से ईमानदारी से सेवा कर रहे हेल्थ वर्कर्स के पेंडिंग मामलों पर भी सरकार बेपरवाह दिख रही है। ज़्यादा पे स्केल पाने के लिए डिपार्टमेंटल एग्जाम की शर्त रखी गई है, लेकिन ये एग्जाम लंबे समय से नहीं हुए हैं। कर्मचारियों की मांग है कि जैसे हाल ही में तलातियों को एग्जाम से छूट देकर ज़्यादा पे स्केल का फायदा दिया गया है, वैसे ही हेल्थ वर्कर्स को भी मिलना चाहिए। खासकर, 50 साल से ज़्यादा उम्र के कर्मचारियों को CCC एग्जाम की तरह ही डिपार्टमेंटल एग्जाम से छूट मिलनी चाहिए ताकि उम्र की सीमा के कारण उनके साथ नाइंसाफी न हो। हेल्थ वर्कर्स हमेशा से जनता की सेहत के लिए कमिटेड रहे हैं और रहेंगे। लेकिन कर्मचारियों पर दबाव डालने के बजाय, सरकार के लिए उनके आर्थिक अधिकारों की रक्षा करना और वैक्सीनेशन प्रोसेस में ट्रांसपेरेंसी लाना ज़रूरी है। अगर सरकार इन मुद्दों का पॉज़िटिव समाधान लाएगी, तभी जनता का भरोसा बना रहेगा और कर्मचारी देश के हित के इस काम में उत्साह से शामिल हो पाएंगे।








