नेपाल में मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 675 तक पहुंचा, 2400 अभी भी लापता; अब तक 108 भारतीय किए गए रेस्क्यू

नेपाल में हर घंटे नई तबाही की दहशत बढ़ती जा रही है। तिब्बत में बनी दो नई झील के खतरे से नेपाल में नई मुसीबत के सायरन बज रहे हैं। एक झील से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है तो दूसरी झील का आकार लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में झील फटने फटने की आशंका के चलते नेपाल में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। त्रिशूली और भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने से नदियों के पास के गांवों को खाली करा लिया गया है। नेपाल में महातबाही से मौत का आंकड़ा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक 675 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और करीब 2400 लोग अभी भी लापता हैं।

108 भारतीयों को नेपाल में किया गया रेस्क्यू

उधर, नेपाल में लोगों की तलाश के लिए लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है। अभी तक रेस्क्यू ऑपरेशन में करीब साढ़े चार हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि नेपाल में अब तक 108 भारतीयों को रेस्क्यू कर लिया गया है।









नेपाल में बचाए गए भारतीय नागरिक 108
जिन भारतीय नागरिकों से संपर्क फिर से हो गया है 50
चीन से नेपाल सुरक्षित पहुंचने वाले भारतीय नागरिक 598
चीन से अभी निकलना बाकी भारतीय नागरिक 900
लापता भारतीय नागरिक 275
लापता भारतीय मूल के लोग 128

(सोर्स- भारतीय विदेश मंत्रालय)

तिब्बत में बनी नई झीलों से नेपाल को खतरा

तिब्बत में बनी नई झीलों से नेपाल पर कितना बड़ा खतरा है, वह भी समझ लीजिए। तिब्बत में प्योरपु त्सांगपो नदी के पास जो पहली झील बनी है, उसका आकार करीब 99 हजार वर्ग मीटर यानी करीब 14 फुटबॉल मैदान के बराबर है। इससे आपको अंदाजा लग सकता है कि ये झील कितनी बड़ी और खतरनाक है।

झीलें फटीं तो आ सकती है और बड़ी तबाही

वहीं, ग्लेशियर के ठीक नीचे बनी दूसरी झील तो साइज में पहली झील से भी बड़ी है। इसका आकार करीब 1 लाख 20 हजार वर्ग मीटर यानी करीब 17 फुटबॉल मैदानों के बराबर का है। ऐसे में अगर ये झीलें फट जाती हैं तो करीब 100 टन TNT ब्लास्ट जितना इम्पैक्ट देखने को मिल सकता है। और इससे नेपाल में 26 अगस्त से भी ज्यादा विनाशकारी प्रलय आ सकता है।

मौसम विभाग ने दी बारिश की चेतावनी

नेपाल में एक ओर जहां झीलों के फटने से तबाही का खतरा मंडरा रहा है तो वहीं रसुवा जिले को लेकर मौसम विभाग ने एक और ऐसा अलर्ट जारी कर दिया है, जिसने नेपाल की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग की मानें तो रसुवा में 30 अगस्त से 1 सितंबर यानी अगले तीन दिनों में 75 फीसदी बारिश की आशंका है। ऐसे में भारी बारिश से नेपाल में मुसीबत और बढ़ना तय है।

आर्मी कैंप में घायलों को दी जा रही मेडिकल हेल्प

नेपाल में रेस्क्यू ऑपरेशन का काम तेजी से चल रहा है। रसुवा से रेस्क्यू करके लाए जा रहे लोगों को आर्मी कैंप में रखा जा रहा है। लेकिन अब रेस्क्यू ऑपरेशन पर जाने वाली टीम अपने साथ मेडिकल हेल्प भी लेकर जा रही है, जिससे घायलों को मौके पर ही मेडिकल हेल्प दी जा सके।

बटार इलाके में पावर स्टेशन तबाह

तिब्बत से आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल में भारी तबाही मचाई। बटार इलाके में नदियों के उफान में पावर स्टेशन पूरी तरह से तबाह हो गया है। तीन दिन पहले तक जहां पावर स्टेशन था, वहां अब बस तबाही और मलबा दिखाई दे रहा है। नेपाल में महातबाही से पावर स्टेशन के साथ ही सोलर प्लांट भी तबाह हो गए। विद्युत विभाग का वर्क स्टेशन पूरी तरह से बर्बाद हो गया है, जिसे अब दोबारा सही करने के लिए भारत की मदद भी ली जा रही है।

कई बस्तियां, सड़कें और पुल टूटे

नेपाल में त्रासदी के बाद प्रभावित इलाकों में हर तरफ केवल बर्बादी और सन्नाटे का खौफनाक मंजर दिखाई दे रहा है। वहीं तबाही के भी नए-नए वीडियो सामने आ रहे हैं। रसुवा और नुवाकोट जिलों में इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। तिनोरे और सियाफ्रूब बेसी जैसे इलाके पूरी तरह से मलबे में तब्दील हो गए हैं। तेज बहाव में कई बस्तियां, सड़कें, पुल और महत्वपूर्ण बिजली परियोजनाएं बह गई हैं। नेपाल में हाहाकार के बीच चमत्कार भी हुआ, जब मलबे में दबी 97 साल की महिला जिंदा निकली गई

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Author: vatsalyanews

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