देश के सबसे साफ शहर में गंदे पानी ने मचाई तबाही, ‘गंदी पानी’ पीने से 7 लोगों की मौत

देश के सबसे साफ शहर इंदौर में गंदे पानी ने हंगामा मचा दिया है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में गंदा पानी पीने से गंभीर बीमारियों का मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं और मुआवजे का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने अस्पताल जाकर प्रभावित लोगों से मुलाकात भी की है। वहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि अधिकारियों की लापरवाही से लोगों की मौत हुई है। प्रशासन ने अब तक एक हफ्ते में सात लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि 100 से ज्यादा लोगों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

इंदौर-1 में भागीरथपुरा शहरी विकास और आवास मंत्री विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र में आता है। उन्होंने कहा है, ‘गंदे पानी के मामले में गलती हुई है, हालांकि, इस पर चर्चा करने के बजाय हमें पहले यह पक्का करना चाहिए कि सभी मरीज ठीक हो जाएं और पॉजिटिव माहौल बने। इस मामले में जो भी ज़िम्मेदार होगा, उसके खिलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह कोई बड़ा अफ़सर ही क्यों न हो।’

विजयवर्गी ने मौत के आंकड़ों के बारे में कहा है, ‘इनमें से कुछ लोगों की मौत नैचुरली हुई है, जबकि कुछ की मौत गंदा पानी पीने से हुई है। इसलिए, हम डॉक्टरों और एडमिनिस्ट्रेशन की जांच के बाद आंकड़े जारी करेंगे। भागीरथपुरा में मरीज़ों की संख्या कम हुई है, हालांकि मरीज़ अभी भी अस्पतालों और हेल्थ सिस्टम में आ रहे हैं। प्रभावित इलाके में चार एम्बुलेंस और मेडिकल स्टाफ़ की अलग-अलग टीमें तैनात की गई हैं।’

गौरतलब है कि इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में पिछले एक हफ़्ते से पीने के पानी में बदबू की शिकायतें आ रही थीं। यह पानी पीने से अचानक बड़ी संख्या में लोगों को उल्टी-दस्त होने लगे। हेल्थ डिपार्टमेंट के मुताबिक, 70 साल के नंदलाल पाल, 60 साल की उर्मिला यादव और 65 साल की तारा कोरी की मौत गंदा पानी पीने से हुई है। हालांकि, स्थानीय लोगों का दावा है कि इससे ज़्यादा लोगों की जान गई है। अभी अलग-अलग अस्पतालों में 111 मरीज़ों का इलाज चल रहा है, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। हेल्थ डिपार्टमेंट ने 12,000 लोगों की हेल्थ स्क्रीनिंग की है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव के सख्त निर्देशों के बाद नगर निगम के ज़िम्मेदार अधिकारियों को फटकार लगाई गई है। एक जोनल ऑफिसर और एक असिस्टेंट इंजीनियर को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया है। एक सब-इंजीनियर की सर्विस खत्म कर दी गई है। पूरे स्कैम की जांच के लिए एक IAS ऑफिसर की अगुवाई में तीन मेंबर की कमेटी बनाई गई है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने मरने वालों के परिवारों को 2 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। उन्होंने इंदौर कलेक्टर और नगर निगम को हर मरीज़ को सबसे अच्छा इलाज देने और पानी की लाइनों में दरार या गंदगी का सोर्स तुरंत ढूंढने का भी आदेश दिया है।

भागीरथपुरा के रहने वालों के मुताबिक, शक है कि नर्मदा का पानी सप्लाई करने वाली पाइपलाइन में सीवेज का पानी मिल गया है। लोगों में इस बात को लेकर काफी गुस्सा है कि सफाई में नंबर 1 माने जाने वाले शहर में पीने के पानी की सुरक्षा को लेकर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे की जा सकती है।

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Author: vatsalyanews

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