वात्सल्यम समाचार.
रिपोर्ट:- रमेश माहेश्वरी – लखपत कच्छ.
लखपत, ता – 28 फरवरी: कच्छ जिले का सबसे दूर और भौगोलिक रूप से सबसे अलग-थलग लखपत तालुका, जहां हेल्थ वर्कर सेवा की कीमत पर अपना काम कर रहे हैं, वहां इस समय एडमिनिस्ट्रेटिव अफरा-तफरी का माहौल देखा जा रहा है। चीफ डिस्ट्रिक्ट हेल्थ ऑफिसर को एक गंभीर शिकायत दी गई है कि मौजूदा तालुका हेल्थ ऑफिसर, जिन्हें अहमदाबाद जिले से ‘सजा’ के तौर पर ट्रांसफर किया गया था, लोकल कर्मचारियों का मानसिक शोषण कर रहे हैं। इस विवाद के कारण, डर है कि बॉर्डर एरिया में मुश्किल से रफ्तार पकड़ रही हेल्थ सर्विस में रुकावट आएगी।
शिकायत के अनुसार, संबंधित ऑफिसर पहले भी गांधीनगर और अहमदाबाद जिलों में विवादों में रहा है और वहां कर्मचारियों को परेशान करने की शिकायतों के बाद ही लखपत में उसका ट्रांसफर किया गया था। कर्मचारियों का आरोप है कि ऑफिसर सजा का अपना गुस्सा लखपत के बेगुनाह कर्मचारियों पर निकाल रहा है। उनके कथित उत्पीड़न के कारण, पिछले एक साल में कई अनुभवी कर्मचारियों और मेडिकल ऑफिसर जैसे गंभीर पदों पर बैठे लोगों ने इस्तीफा दे दिया है, जो हेल्थ सिस्टम के लिए चिंता की बात है। कर्मचारियों का आरोप है कि यह अधिकारी महिला कर्मचारियों को गलत तरीके से ऑफिस टाइम के बाद भी रोकता है और सबके सामने उनकी बेइज्जती करता है। इतना ही नहीं, छुट्टी के मामले में भी बहुत ज़्यादा असंवेदनशीलता दिखाई जाती है। एक मामले में तो यह भी गंभीर आरोप लगे हैं कि पिता की मौत पर छुट्टी पर गई एक कर्मचारी की सैलरी काटने की धमकी दी गई और मैटरनिटी लीव पर गई एक महिला कर्मचारी की सैलरी रोक दी गई। तालुका हेल्थ ऑफिसर की बातचीत की भाषा और स्टाइल भी विवादित सामने आई है। छोटी-छोटी बातों में कारण बताओ नोटिस जारी करने, WhatsApp ग्रुप में धमकाने और जिला लेवल पर रिपोर्ट को गलत तरीके से पेश करने से फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों का हौसला टूट रहा है। कर्मचारियों के बीच यह बात फैली है कि अगर इस अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो लखपत तालुका के आम लोगों तक पहुंचने वाली हेल्थ सर्विस में रुकावट आएगी। जानकारों का कहना है कि लखपत के लोगों की हेल्थ और सेहत तभी बेहतर होगी जब सरकार के चुने हुए नुमाइंदे ऐसे अधिकारी से छुटकारा पाएं जो कर्मचारियों को ‘मेंटल टॉर्चर’ कर रहा है। इस मामले की हाई-लेवल जांच की मांग हो रही है।








