मोरबी की गाय माता को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने और गौचर मुक्ति के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को ज्ञापन

मोरबी मोरबी भारतीय संस्कृति में सबसे ऊँचा स्थान रखने वाली गाय माता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और गौवंश की सुरक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के उच्च प्रशासनिक ढाँचों को लिखित रूप से एक रिप्रेजेंटेशन दिया गया है।

रिप्रेजेंटेशन के मुख्य बिंदु: राष्ट्रीय पशु का दर्जा: चूँकि गाय माता भारत की सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक आस्था का केंद्र है, इसलिए उसे आधिकारिक तौर पर ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित किया जाना चाहिए। चरागाह की ज़मीन पर कब्ज़े से आज़ादी: राज्य के अलग-अलग इलाकों में चरागाह की ज़मीन पर अवैध कब्ज़े तुरंत हटाए जाने चाहिए और उस ज़मीन को चरागाह के लिए खोला जाना चाहिए। नंदी घर और गौशाला की स्थापना: हर इलाके में सही नंदी घर और आधुनिक गौशाला बनाई जानी चाहिए ताकि आवारा पशुओं को आश्रय मिल सके।

ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी: गाय की नस्ल की सुरक्षा के लिए कानूनी प्रावधानों को और सख़्त बनाने और ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ के साथ पारदर्शी कार्रवाई करने की माँग की गई है। “गाय की नस्ल की सुरक्षा सिर्फ़ धार्मिक विषय नहीं है, बल्कि यह भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक सद्भाव का मूल मंत्र है। यह समय की मांग है कि सरकार गाय की आज़ादी और गाय की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए।” अजयभाई झलारिया (पूर्व उपाध्यक्ष, मोरबी जिला BJP किसान मोर्चा) ने आगे कहा कि गाय की नस्ल सुरक्षित रहेगी, तभी देश की भलाई बनी रहेगी। इस प्रेजेंटेशन के ज़रिए उन्होंने सीनियर पदाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों से अनुरोध किया है कि वे इस दिशा में सही नियमों के अनुसार तुरंत कार्रवाई करें।

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Author: vatsalyanews

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