PM मोदी ने शहबाज शरीफ के सामने सुनाई खरी-खरी, कहा- ‘आतंकवाद का पूरा नेटवर्क खत्म करो’

Highlights

  • शहबाज शरीफ की मौजूदगी में PM मोदी ने कहा, आतंकवाद किसी का रणनीतिक हथियार नहीं बन सकता।
  • PM मोदी ने आतंकवाद की फंडिंग, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकानों का पूरा नेटवर्क खत्म करने पर जोर दिया।
  • पश्चिम एशिया संकट पर बोले PM मोदी, युद्ध नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति से समाधान संभव है।

बिश्केक: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को लेकर SCO शिखर सम्मेलन में बेहद सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद किसी के लिए भी ‘रणनीतिक संपत्ति’ नहीं हो सकता। आतंकवाद को नीति के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने वाले और आतंकियों को पनाह व समर्थन देने वाले देशों को कड़ा संदेश दिया जाना चाहिए। पीएम मोदी ने मंगलवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद पूरी मानवता के सामने एक गंभीर चुनौती है।

आतंकवाद का पूरा सिस्टम खत्म करना होगा

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को सिर्फ आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसके पीछे काम करने वाले पूरे नेटवर्क को खत्म करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद की फंडिंग, आतंकियों की भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकानों के पूरे तंत्र को खत्म करना होगा। इस गंभीर मुद्दे पर सभी देशों को एक आवाज में बोलना चाहिए और किसी भी तरह के दोहरे मापदंड की जगह नहीं होनी चाहिए। पीएम मोदी ने साफ कहा कि जो देश आतंकवाद को अपनी नीतियों के एक साधन के तौर पर इस्तेमाल करते हैं और आतंकियों को पनाह या समर्थन देते हैं, उन्हें कड़ा संदेश दिया जाना चाहिए कि आतंकवाद किसी के लिए भी ‘रणनीतिक संपत्ति’ नहीं हो सकता।

‘भारत की पहली प्राथमिकता है शांति और सुरक्षा’

पीएम मोदी ने कहा कि SCO के लिए भारत की सोच के 3 प्रमुख आधार हैं शांति और सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण और सुरक्षित यूरेशिया का साझा लक्ष्य अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता से भी जुड़ा है। भारत अफगानिस्तान के लोगों के विकास और मानवीय सहायता के लिए लगातार योगदान देता रहा है और आगे भी ऐसा करता रहेगा। पश्चिम एशिया में जारी संकट का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 

‘किसी एक क्षेत्र में होने वाला संघर्ष सिर्फ उसी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। उसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन पर पड़ता है। इसका सबसे ज्यादा बोझ ग्लोबल साउथ के देशों को उठाना पड़ता है। भारत का लगातार मानना रहा है कि तनाव और युद्ध का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही निकाला जा सकता है।’

‘ड्रग्स की तस्करी भी है बड़ी चुनौती’

प्रधानमंत्री मोदी ने ड्रग्स की तस्करी को युवाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने SCO के उन तंत्रों के जरिए सहयोग मजबूत करने की जरूरत बताई, जो सुरक्षा खतरों, संगठित अपराध, सूचना सुरक्षा और नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों को देखते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि इन व्यवस्थाओं को सिर्फ बैठकों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें व्यावहारिक सहयोग और समय पर कार्रवाई का प्रभावी माध्यम बनाया जाना चाहिए।

‘लोगों तक सीधे पहुंचे SCO का फायदा’

पीएम मोदी ने कहा कि SCO के सहयोग का लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने लोगों के बीच संबंधों को इस संगठन की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि भारत के लिए SCO महान सभ्यताओं, संस्कृतियों और विचारों का संगम है। संगठन के अगले 25 वर्षों में लोगों के बीच संबंधों को सहयोग के केंद्र में रखा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि SCO की सफलता का असली पैमाना यह होना चाहिए कि उसके प्रयासों से युवाओं के लिए कितने नए अवसर पैदा हुए, उद्यमियों के लिए कितने नए बाजार खुले, किसानों को तकनीक से कितना फायदा मिला और आम नागरिकों का जीवन कितना बेहतर हुआ। उन्होंने कहा कि यही ‘सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर’ का असली अर्थ है।

बिश्केक में जुटे हैं SCO के बड़े नेता

किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव इस SCO शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहे हैं और फिलहाल संगठन के अध्यक्ष हैं। सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव और ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन भी मौजूद हैं। 26वें SCO लीडरशिप समिट में 10 सदस्य देश, 15 पार्टनर देश और दो ऑब्जर्वर देश शामिल हैं। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत और सहयोग को आगे बढ़ाना है।

दुनिया की अर्थव्यवस्था में SCO की बड़ी हिस्सेदारी

SCO के 10 सदस्य देश मिलकर दुनिया की GDP का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। संगठन के सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय कानून के मान्यता प्राप्त सिद्धांतों और नियमों के आधार पर आपसी हितों वाले क्षेत्रों में अच्छे पड़ोसी संबंध, दोस्ती और सहयोग को मजबूत कर रहे हैं। SCO के प्रमुख उद्देश्यों में आपसी विश्वास, दोस्ती और अच्छे पड़ोसी संबंधों को मजबूत करना, क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना, नई चुनौतियों और खतरों से मिलकर निपटना, आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना तथा सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को आगे बढ़ाना शामिल है।

2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। यह सम्मेलन SCO की स्थापना के 25 साल पूरे होने के मौके पर हो रहा है। भारत वर्ष 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना था। इस बार सम्मेलन का आयोजन विस्तारित ‘SCO Plus’ फॉर्मेट में भी किया जा रहा है, जिसमें संगठन से जुड़े एक दर्जन से ज्यादा देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं। इस विस्तारित बैठक में तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन, अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव, आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान, मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागीन खुरेलसुख, लाओस के राष्ट्रपति थोंगलौन सिसोलिथ और टोगो के राष्ट्रपति फॉरे ग्नासिंग्बे सहित कई नेता शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए बिश्केक पहुंच चुके हैं।

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Author: vatsalyanews

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