वात्सल्यम समाचार प्रवीणभाई चौहान वाव थराद
बस स्टैंड, कमेटी हॉल खस्ताहाल होने के बावजूद छह महीने बाद भी कोई कार्रवाई नहीं – बबूल की कटाई में अवैध वसूली, गांववालों की जान खतरे में
थराद तालुका की गड़सीसर और पीरगढ़ ग्रुप ग्राम पंचायतों में सरपंच और तलाटी द्वारा दिखाई जा रही बड़ी लापरवाही के खिलाफ गांववालों ने अब खुलकर अपना गुस्सा जाहिर किया है। हालांकि दोनों गांवों का बस स्टैंड और पीरगढ़ का कमेटी हॉल बहुत खस्ताहाल हालत में है, लेकिन पिछले छह महीने से उन्हें “गिराने का फैसला” होने के बावजूद आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, और लोग अपनी जान जोखिम में डालकर आने-जाने को मजबूर हैं।
गांववालों के मुताबिक, अगर पंचायत की गंभीर लापरवाही के कारण कोई बड़ा हादसा होता है, तो इसके लिए सरपंच और तलाटी पूरी तरह जिम्मेदार होंगे।
दूसरी ओर, गड़सीसर गांव के बाहरी इलाके में खड़े गंदे बबूल की घनी कटाई में बड़े पैमाने पर अवैध वसूली की चर्चा ने खूब चर्चा बटोरी है। आरोप है कि राजस्थान से आने वाले लोगों से हर टोल पर 1000 रुपये वसूले जा रहे हैं। गांव में खुलेआम चर्चा है कि इस पूरे प्रोसेस में सरपंच और तलाटी सीधे तौर पर शामिल हैं।
पीरगढ़ गांव में पीने के पानी की भी भारी कमी है, वहीं पूरे गांव में कचरा फैला हुआ है और सफाई की तस्वीर सिर्फ कागजों पर है। इतना ही नहीं, गड़सीसर गांव में डेयरी का गंदा पानी खुलेआम सड़क और रास्ते पर बह रहा है, जिससे बदबू आ रही है और महामारी का डर पैदा हो गया है।
मीडिया ने इस पूरे मामले पर सरपंच से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन सरपंच फोन नहीं उठा रहे थे, इसलिए उनके बेटे ने उनसे फोन पर बात की। जब मीडिया ने बबूल की कटिंग इकट्ठा करने के बारे में पूछा, तो जवाब मिला, “हम इस पैसे का इस्तेमाल पंचायत के लिए करते हैं।” सरकार से ग्रांट न मिलने की बात करते हुए वह भड़क गए और बोले, “पैसे इकट्ठा करने आए हो? कहां देखना है?”
ऐसी घमंडी भाषा और ज़िम्मेदारी से भागने का रवैया साफ़ तौर पर सरपंच तलाटी की लापरवाही और मनमानी दिखाता है। पहले भी बाढ़ के दौरान पीरगढ़ गांव के लोगों ने सरपंच के खिलाफ़ बहुत गुस्सा दिखाया था, लेकिन आज तक कोई सुधार नहीं हुआ।









