‘दुनिया को संकटों से निपटने के लिए साथ आना होगा’, UNGA में विदेश मंत्री जयशंकर का दमदार भाषण

Highlights

  • जयशंकर ने कहा, तनाव और संघर्षों के बीच बहुपक्षवाद को मजबूती से आगे आना होगा।
  • विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र में पारदर्शी और ज्यादा भागीदारी वाली व्यवस्था की मांग की।
  • जयशंकर ने स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री और नाउरू के राष्ट्रपति से भी मुलाकात की।

न्यूयॉर्क: UNGA के 81वें सत्र के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक व्यवस्था में बढ़ते तनाव और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच बहुपक्षवाद को मजबूत करने की जोरदार वकालत की है। ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलैटरलिज्म’ समिट में जयशंकर ने कहा कि दुनिया के सामने शांति, सुरक्षा, जलवायु, आतंकवाद, नई तकनीक और वैश्विक सप्लाई चेन जैसी बड़ी चुनौतियां हैं, जिनका समाधान देशों के मिलकर काम करने से ही संभव है। उन्होंने UN समेत अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में ज्यादा भागीदारी और पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया के साथ ‘रिफॉर्म्ड मल्टीलैटरलिज्म’ की जरूरत पर भी जोर दिया।

‘बहुपक्षवाद को अपनी भूमिका निभानी होगी’

जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय बड़े संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रही है।  उन्होंने कहा,

‘पिछले कुछ दशकों में वैश्विक शक्ति संतुलन में धीरे-धीरे बदलाव हो रहा था, जिसे लंबे समय से अपेक्षित बदलाव माना जाता था। लेकिन अब अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनाव और वास्तविक संघर्षों ने इस बदलाव को और गंभीर रूप दे दिया है। अगर इन परिस्थितियों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना पर सवाल खड़े हो सकते हैं। इसलिए मौजूदा समय में बहुपक्षवाद को मजबूती से अपनी भूमिका निभानी होगी।’

अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मुद्दे पर क्या बोले जयशंकर?

विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत केवल कूटनीतिक बातचीत तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर दुनिया की शांति, सुरक्षा और विकास पर पड़ता है। जयशंकर ने कहा कि वैश्विक शांति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई और जलवायु न्याय, उभरती तकनीकों, विकास के लिए वित्त, आतंकवाद से मुकाबले, ग्लोबल सप्लाई चेन को मजबूत करने, आपदा से निपटने और भविष्य की महामारियों की तैयारी जैसे मुद्दों का समाधान देशों की मिलकर काम करने की इच्छा पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा,

‘अब तक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में जो भी उपलब्धियां हासिल हुई हैं, वे सबके द्वारा मिलजुलकर किए गए प्रयासों का नतीजा हैं। इसलिए जो अच्छा हासिल किया गया है, उसे सुरक्षित रखते हुए आगे बेहतर व्यवस्था बनाने की कोशिश करनी चाहिए।’

‘समस्याओं से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं’

जयशंकर ने चल रहे संघर्षों और वैश्विक संकटों से निपटने के लिए व्यावहारिक और लक्षित कदम उठाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यापक शांति समझौते की कोशिश जारी रहते हुए भी किसी संघर्ष के खास पहलुओं पर तत्काल काम किया जा सकता है। उन्होंने ईंधन, भोजन, उर्वरक और वित्त की समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन चारों संकटों को अपने हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता। जयशंकर ने कहा कि दुनिया को ऐसे कई मुद्दों पर एक साथ काम करना होगा, जहां तत्काल सामूहिक कार्रवाई की जरूरत है।

नई तकनीक के लिए नियम और ‘गार्डरेल’ जरूरी

विदेश मंत्री ने उभरती तकनीकों और नई क्षमताओं से पैदा होने वाली चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जहां नई क्षमताओं के साथ नई चिंताएं सामने आ रही हैं, वहां अंतरराष्ट्रीय नियम और सुरक्षा के स्पष्ट ढांचे यानी ‘गार्डरेल’ बनाने की मजबूत जरूरत है। जयशंकर ने वैश्विक सप्लाई चेन की कमजोरियों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा,

‘जहां किसी खास जगह या व्यवस्था पर अत्यधिक निर्भरता से संकट पैदा होने का खतरा है, वहां जोखिम कम करने और आपूर्ति के अलग-अलग विकल्प विकसित करने को बढ़ावा देना चाहिए। जिन देशों के हित समान हैं, उन्हें उन मुद्दों पर मिलकर काम करने का भरोसा होना चाहिए, जहां सामूहिक कार्रवाई की स्पष्ट जरूरत है।’

‘अंतरराष्ट्रीय कानून और नियमों का पालन जरूरी’

जयशंकर ने कहा कि बहुपक्षवाद तभी मजबूत होगा जब अंतरराष्ट्रीय कानून, नियमों और मानकों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बहुपक्षवाद को आगे बढ़ाने के लिए केवल उसकी वकालत करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे व्यवहार में भी मजबूत करना होगा। इसी वजह से ‘बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार’ जरूरी है। जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में ज्यादा देशों की भागीदारी होनी चाहिए और फैसले अधिक पारदर्शी तरीके से लिए जाने चाहिए।

स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री से भी मुलाकात

UNGA के दौरान जयशंकर ने कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें भी कीं। उन्होंने स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री इग्नाजियो कैसिस से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और स्विट्जरलैंड के बीच मजबूत होते आर्थिक संबंधों पर चर्चा की। खास तौर पर भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की समीक्षा की गई। जयशंकर ने कहा कि बैठक में वैश्विक मुद्दों और बहुपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर भी बातचीत हुई।

नाउरू के राष्ट्रपति से भी हुई विदेश मंत्री की बात

जयशंकर ने नाउरू के राष्ट्रपति डेविड अडियांग से भी मुलाकात की। उन्होंने प्रशांत द्वीपीय देश नाउरू के साथ भारत के मजबूत द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत नाउरू के विकास में साझेदार के रूप में अपनी प्रतिबद्धता को मजबूती से जारी रखेगा। बता दें कि UNGA से पहले BRICS समिट की सफलता को लेकर दिया गया जयशंकर का बयान काफी चर्चित हुआ था(ANI से इनपुट्स के साथ)

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Author: vatsalyanews

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