100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल तो बिगड़ा तेल कंपनियों का हिसाब, पेट्रोल पर ₹5 और डीजल पर ₹23 प्रति लीटर का घाटा

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिखाई देने लगा है। इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारत की सरकारी तेल कंपनियों का हिसाब बिगड़ गया है। मौजूदा कीमतों और घरेलू पंप रेट के बीच अंतर के चलते कंपनियों को पेट्रोल पर करीब ₹5 और डीजल पर ₹23 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। खास बात यह है कि घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और पश्चिम एशिया में सप्लाई को लेकर चिंता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड करीब 2.5 फीसदी बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड भी करीब 2 फीसदी चढ़कर लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। आपको बता दें कि अगर भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है।

पेट्रोल-डीजल बेचने पर तेल कंपनियों को घाटा

ICRA के वरिष्ठ अधिकारी प्रशांत वशिष्ठ के अनुसार, सितंबर में अब तक के औसत कच्चे तेल भाव के आधार पर तेल कंपनियों का पेट्रोल पर मार्केटिंग मार्जिन करीब ₹5 प्रति लीटर निगेटिव है। वहीं डीजल पर यह नुकसान करीब ₹23 प्रति लीटर है। घरेलू LPG पर भी कंपनियों को करीब ₹200 प्रति सिलेंडर की अंडर-रिकवरी हो रही है। इसका सीधा कारण यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हो गया है, लेकिन घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़े हैं।

तीन महीने से नहीं बदले पेट्रोल-डीजल के दाम

देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें तीन महीने से ज्यादा समय से स्थिर हैं। आखिरी बार 25 मई को पेट्रोल की कीमत में ₹2.61 और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी। मई के दूसरे हिस्से में कुल चार चरणों में पेट्रोल ₹7.35 और डीजल ₹7.53 प्रति लीटर महंगा हुआ था।

भारत पर बढ़ सकता है आर्थिक दबाव

भारत अपनी जरूरत के 88 फीसदी से ज्यादा कच्चे तेल का आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी का सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ता है। अप्रैल-जुलाई के दौरान भारत का कच्चे तेल का आयात बिल 56 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 63.4 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 40.5 अरब डॉलर था।

इनपुट- PTI

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Author: vatsalyanews

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