शांतिधारा करने से आंतरिक कलह, मानसिक अशांति और ग्रह दोष दूर होते हैं – मुनिराज नयशेखर महाराज साहेब

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पूजा ठक्कर – मुंडारा कच्छ।

शांति धारा करने से अंदरूनी परेशानियां, मानसिक अशांति, ग्रह दोष दूर होते हैं – मुनिराज नयशेखर महाराज साहेब

शंखेश्वर महातीर्थ के जहाज मंदिर में शांति धारा पाठ का भव्य आयोजन किया गया।

विश्व शांति के लिए शंखेश्वर तीर्थ के एंकरवाला धाम में शांति धारा पाठ का आयोजन किया गया। इस मौके पर पूज्य मुनिराजश्री नयशेखर महाराज साहेब ने शांति धारा पाठ की महिमा बताते हुए कहा कि जैन धर्म में शांति, अहिंसा और आत्मशुद्धि को सबसे ऊपर स्थान दिया गया है। ऐसे आध्यात्मिक मार्ग में शांति धारा पाठ का खास महत्व है। शांति धारा पाठ भगवान तीर्थंकर के चरणों में की जाने वाली भक्ति धारा है, जिससे दुनिया में शांति, समृद्धि और कल्याण की भावना फैलती है। शांति धारा करते समय मंत्रों के जाप के साथ भगवान की मूर्ति पर जल पूजन आदि चढ़ाया जाता है। यह धारा आत्मा की अशुद्धियों को धोने का प्रतीक है। जैसे धारा से मूर्ति शुद्ध होती है, वैसे ही भक्त के मन, वाणी और कर्म भी शुद्ध हो जाते हैं। जैन शास्त्रों में मान्यता है कि शांति धारा का पाठ करने से आंतरिक क्लेश, मानसिक अशांति, ग्रह दोष और दुर्भाग्य दूर होते हैं। यह पाठ केवल व्यक्तिगत कल्याण के लिए ही नहीं बल्कि संपूर्ण समाज और विश्व में शांति स्थापित करने के लिए किया जाता है। विशेषकर बीमारी, आपदा, अशांति या संकट के समय शांति धारा पाठ का विशेष महत्व है। शांति धारा पाठ से अहिंसा, करुणा, क्षमा और समता जैसे गुणों का विकास होता है। भक्त के हृदय में दुर्गुणों का नाश होता है और सद्भावना व मैत्री का पोषण होता है। यह पाठ आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का सरल और प्रभावी उपाय है। संक्षेप में जैन शांति धारा पाठ केवल एक अनुष्ठान नहीं बल्कि आध्यात्मिक शुद्धि और वैश्विक शांति का एक पवित्र साधन है। नियमित रूप से भक्ति भाव से शांति धारा का पाठ करने से जीवन में सुख, शांति और आत्मसंतुष्टि आती है। इस अवसर पर मौनी वरिष्ठ प.पू. इस मौके पर मुनिराजश्री पुण्यरत्न महाराज साहेब, प.पू. मुनिराजश्री नयशेखर महाराज साहेब और प.पू. सा. सुनंदिताश्रीजी म.सा और प.पू. सा. भयभंजनाश्रीजी म.सा आदि मौजूद थे।

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Author: vatsalyanews

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