ईरान में हालात तेज़ी से बिगड़ रहे हैं। US प्रेसिडेंट के बयान और धमकियां भी हालात को तेज़ी से खराब कर रही हैं। इन सबके बीच, पूरे ईरान में मार्शल लॉ लगा दिया गया है। ईरान में पिछले कई दिनों से सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई है और हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ईरान इंटरनेशनल के मुताबिक, हालात को कंट्रोल करने के लिए मार्शल लॉ लगाया गया है।
महसा अमीनी की मौत के बाद, प्रदर्शनकारियों ने हिजाब और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर सख्ती की है। इसके तहत, इंटरनेट और फोन सर्विस बंद कर दी गई हैं। अब, मार्शल लॉ लगा दिया गया है।
मार्शल लॉ लगाकर, सरकार मिलिट्री फोर्स को किसी इलाके पर कंट्रोल दे देती है और नॉर्मल लॉ एंड ऑर्डर को कुछ समय के लिए रोक देती है। मार्शल लॉ के दौरान, हालात को कंट्रोल करने के लिए मिलिट्री को कर्फ्यू और दूसरी पाबंदियों जैसे खास अधिकार दिए जाते हैं। मार्शल लॉ के दौरान, मिलिट्री को लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने का काम सौंपा जाता है।
ईरान के मौजूदा हालात किसी से छिपे नहीं हैं। यही वजह है कि हालात को कंट्रोल करने के लिए मार्शल लॉ लगाने का फैसला लिया गया। ईरान में इससे पहले 8 सितंबर 1978 को मार्शल लॉ लगाया गया था। उस समय शाह मोहम्मद रजा पहलवी ने तेहरान और दूसरे बड़े शहरों में मार्शल लॉ का ऐलान किया था।
ईरान की सड़कों पर 10 दिनों से विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। राजधानी तेहरान में 28 दिसंबर को विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। अगले ही दिन ये आस-पास के कई शहरों में फैल गए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई बार झड़पें हुईं। 1 जनवरी के बाद विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए। खामेनेई ने इन प्रदर्शनकारियों को दंगाई कहा। इन विरोध प्रदर्शनों में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों लोग अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं।
ईरान के मौजूदा हालात किसी से छिपे नहीं हैं। यही वजह है कि हालात को काबू में करने के लिए मार्शल लॉ लगाने का फैसला लिया गया। इससे पहले ईरान में 8 सितंबर 1978 को मार्शल लॉ लगाया गया था। उस समय शाह मोहम्मद रजा पहलवी ने तेहरान और दूसरे बड़े शहरों में मार्शल लॉ का ऐलान किया था।










