अहमदाबाद में ‘अखंड शक्ति त्रिशूल’ के दर्शन की भव्य शुरुआत, अंबाजी के त्रिशूलिया घाट को मिलेगा नया आध्यात्मिक आकर्षण

रिपोर्टर
हितेंद्र गोसाई
अहमदाबाद

अहमदाबाद के वटवा इलाके में भव्य ‘अखंड शक्ति त्रिशूल’ का औपचारिक उद्घाटन किया गया। बनासकांठा के जिला कलेक्टर और आरासुरी अंबाजी माता देवस्थान ट्रस्ट के चेयरमैन मिहिर पटेल के हाथों इस दिव्य त्रिशूल को भक्तों के दर्शन के लिए खोला गया। इस मौके पर अहमदाबाद के डिप्टी मेयर जतिनभाई पटेल समेत बड़ी संख्या में भक्त और नेता मौजूद थे।

उत्तरकाशी में स्थित 1500 साल पुरानी शक्ति परंपरा की दिव्य प्रेरणा से तैयार यह विशाल त्रिशूल 16 फीट ऊंचा है और इसका वजन लगभग 600 kg है। आने वाले समय में इस त्रिशूल को अंबाजी के मशहूर त्रिशूलिया घाट पर स्थापित किया जाएगा, जो अंबाजी तीर्थयात्रा की आध्यात्मिक भव्यता को एक नया लेवल देगा।

इस मौके पर मिहिर पटेल ने कहा कि पालनपुर और दांता मार्ग से आने वाला त्रिशूलिया घाट पहले पैदल आने वाले श्रद्धालुओं के लिए दुर्गम और दुर्घटना-ग्रस्त था। इस जगह की पवित्रता और महत्व को और बताने के लिए, उत्तरकाशी में मौजूद 1500 साल से भी ज़्यादा पुराने पवित्र शक्ति त्रिशूल की एक कॉपी यहां लगाने का आइडिया पेश किया गया। इसके लिए उत्तरकाशी के महंत से खुद जाकर परमिशन ली गई है। आध्यात्मिक परंपरा को बनाए रखते हुए, उत्तरकाशी के 18 फुट के त्रिशूल के सामने अंबाजी में 16 फुट का त्रिशूल लगाया जाएगा, जो शक्ति उपासकों के लिए आस्था का नया सेंटर बनेगा।

उन्होंने जय भोले ग्रुप की निस्वार्थ सेवा और इमोशनल जुड़ाव की तारीफ़ की और कहा कि यह ग्रुप लंबे समय से अंबाजी ट्रस्ट से जुड़ा हुआ है। अंबाजी मंदिर में प्रधानमंत्री द्वारा लगाया गया दुनिया का सबसे बड़ा श्री यंत्र भी इसी ग्रुप ने बनवाया था। माताजी के श्रृंगार समेत कई सेवा कामों में ग्रुप का सहयोग अहम रहा है।

इस मौके पर डिप्टी मेयर जतिनभाई पटेल ने कहा कि टेक्नोलॉजी और बिज़ी लाइफस्टाइल के ज़माने में यह प्रोजेक्ट अंबाजी के शानदार इतिहास और महिषासुर मर्दिनी की कहानी को लोगों तक पहुंचाने में अहम साबित होगा। त्रिशूलिया घाट पर इस दिव्य त्रिशूल के लगने से, जो पहले एक्सीडेंट ज़ोन के तौर पर जाना जाता था, वह जगह अब पूजा की पवित्र जगह बनेगी और धार्मिक जागरूकता बढ़ेगी।

जय भोले ग्रुप के दीपेशभाई पटेल ने त्रिशूल के पौराणिक महत्व के बारे में बताया कि यह त्रिशूल उत्तरकाशी में खुद माता जगदंबा द्वारा लगाए गए पुराने शक्ति त्रिशूल का पहला रेप्लिका है। पुराणों के मुताबिक, भगवान शिव द्वारा चढ़ाए गए इसी शक्ति त्रिशूल से महिषासुर का वध हुआ था और फिर इसे उत्तरकाशी में लगाया गया था। इस परंपरा को ज़िंदा रखने और अंबाजी के त्रिशूलिया घाट को और दिव्य बनाने के लिए इस त्रिशूल का निर्माण किया गया है।

गौरतलब है कि इस दिव्य त्रिशूल के दर्शन 18 से 21 जनवरी तक हर दिन दोपहर 3 बजे से रात 8 बजे तक अहमदाबाद के वटवा में मौजूद अहमदाबाद इंजीनियर्स में खुले रखे गए हैं। उसके बाद, इस त्रिशूल को औपचारिक धार्मिक रस्मों के साथ अंबाजी के त्रिशूलिया घाट पर स्थापित किया जाएगा।

इस कार्यक्रम के दौरान, महिषासुर वध, मैसूर, अंबाजी शक्तिपीठ और त्रिशूलिया घाट से जुड़ी पौराणिक कहानियों और शक्ति के प्रतीकों को दिखाने वाली एक ऑडियो-विजुअल फिल्म भी काशी विश्वनाथ मंदिर, महिषासुर मर्दिनी द्वारा दिखाई गई।

‘अखंड शक्ति त्रिशूल’ के दर्शन के मौके पर अंबाजी मंदिर के एडमिनिस्ट्रेटर कौशिकभाई मोदी, जय भोले ग्रुप के सदस्य, स्थानीय नेता और बड़ी संख्या में माई भक्त मौजूद थे। इस पहल को एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है जो अंबाजी तीर्थ को एक नई आध्यात्मिक पहचान देता है।

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Author: vatsalyanews

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