मेहमानों को दिव्यांगों के बनाए गुलदस्तों से सम्मानित किया गया — यही सेरेमनी की खास बात थी।

संस्कृति मानव सेवा संस्था दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाना चाहती है— डॉ. रितु सिंह

पत्रकार भारत भोगायता द्वारा

संस्कृति मानव सेवा संस्था, राम हाउस, सुमंगलम सोसाइटी, ड्राइविंग सिनेमा के सामने, थलतेज, अहमदाबाद एक सेवा संस्था है जो पिछले तेरह सालों से सभी तरह के दिव्यांगों के लिए काम कर रही है। संस्था का मुख्य मकसद दिव्यांग भाई-बहनों को आत्म-सम्मान और इज्ज़त के साथ ज़िंदगी में सही दिशा देना है।

26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर, संस्था के मुख्य मेहमान अशोक भट्टी, RPI (रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया) के गुजरात स्टेट प्रेसिडेंट, सीनियर एडवोकेट दिलीप भट्ट, जो एक रिटायर्ड जज भी हैं, और धीरज भाटिया, वाइस प्रेसिडेंट (RPI – रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया, जिसके नेशनल प्रेसिडेंट माननीय रामदास अठावले हैं) थे। इस शुभ अवसर पर, संस्कृति मानव सेवा संस्था ने सभी दिव्यांगों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाओं के साथ तोहफ़े में बैग दिए। इस कार्यक्रम में संस्था के टीम सदस्य भाविनभाई, विक्रम राजपूत, श्याम, किरण शर्मा, मंजुलाबा, कमलेश आंटी, पारुल गुप्ता, संस्कृति, भाविक, कीर्ति, विधि, नाम्या, अमित के साथ ही मास्टर राम, मास्टर विहान और महज पांच साल के मास्टर राम मौजूद रहे। मास्टर राम ने बहुत ही सुंदर गीत प्रस्तुत किया, जिसने मौजूद सभी लोगों को भावविभोर कर दिया। संस्कृति मानव सेवा संस्था पिछले तेरह वर्षों से दिव्यांगों को हस्तशिल्प के क्षेत्र में हुनरमंद बना रही है। इस कार्यक्रम के दौरान अतिथियों का स्वागत दिव्यांग भाई-बहनों द्वारा बनाए गए सुंदर गुलदस्तों से किया गया, जिसकी अतिथियों ने खूब सराहना की। अतिथियों ने यह भी विश्वास जताया कि दिव्यांग भाई-बहनों को ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर दिए जाएंगे, ताकि वे समाज में स्वाभिमान और सम्मान के साथ अपने पैरों पर खड़े हो सकें और उनकी कला दूर-दूर तक पहुंच सके। सभी दिव्यांगों के लिए खास भावना रखने वाली संस्कृति मानव सेवा संस्था की अध्यक्ष डॉ. रितु सिंह किसी को भी मजबूरी में जीते हुए नहीं देखना चाहतीं। वह अपने चलाए जा रहे ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत ‘स्वदेशी अपनाओ’ के वादे को बड़ी लगन और मेहनत से आगे बढ़ा रही हैं।
उनकी कोशिश है कि कोई भी दिव्यांग व्यक्ति दूसरों पर निर्भर न रहे, वह जितना हो सके मेहनत करे और आत्मनिर्भरता के साथ अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़े, और यह बात जगजाहिर है कि उनका मकसद आत्मनिर्भर बनना है।

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–शुभकामनाएं

भारत जी. भोगायता

B.sc.,L.L.B.,d.n.y.(GAU) पत्रकारिता (हिंदी), इंडस्ट्रियल रिलेशन और पर्सनल मैनेजमेंट (डॉ. राजेंद्रप्रसाद यूनिवर्सिटी-मुंबई)

पत्रकार (सरकारी मान्यता प्राप्त)

जामनगर- 361008

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