SIR ऑपरेशन विवाद: वोटर्स के नाम कैंसिल करने के लिए 9.88 लाख फॉर्म-7 भरे गए, चुनाव आयोग की चुप्पी से हंगामा!

गुजरात में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) का ऑपरेशन विवादों में रहा है क्योंकि वोटर्स के नाम कैंसिल करने के लिए लाखों ऑब्जेक्शन उठाए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि गलत नाम और सिग्नेचर होने के बावजूद बिना वेरिफिकेशन के फॉर्म-7 स्वीकार कर लिए गए हैं। इतना ही नहीं, गुजरात में 9.88 लाख वोटर्स के नाम कैंसिल करने के इरादे से उनसे फॉर्म-7 भरवाए गए हैं। इसे देखते हुए कांग्रेस ने राज्य चुनाव आयोग के सामने कड़ा विरोध जताया है। साथ ही, मांग की है कि गलत फॉर्म-7 भरने वालों के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज किया जाए।

राज्य में वोटर लिस्ट में सुधार का काम चल रहा है, लेकिन 70 लाख से ज़्यादा वोटर्स की मैपिंग नहीं हो पाई है। वोटर्स के नाम डुप्लीकेट करने की कोशिश हो रही है, वहीं विपक्ष ने राज्य चुनाव आयोग पर निशाना साधा है क्योंकि गुजरात में एक भी विधानसभा सीट ऐसी नहीं है जहां दस हज़ार से ज़्यादा फॉर्म-7 न भरे गए हों। खास बात यह है कि वोटर का नाम कैंसिल करने के लिए Form-7 भरने वाले व्यक्ति को सबूत देना ज़रूरी तो है, लेकिन इस बारे में कोई सफाई नहीं दी गई है। आरोप है कि गलत नाम और गलत साइन होने के बावजूद Form-7 स्वीकार कर लिए गए हैं, जो गंभीर लापरवाही है। पिछली बार के मुकाबले इस बार लाखों आपत्तियां आने से शक पैदा हो गया है। इसके अलावा, BLO के मना करने के बावजूद अधिकारियों ने फॉर्म स्वीकार कर लिए हैं। चूंकि 18 जनवरी आखिरी तारीख है, इसलिए पिछले तीन दिनों में लाखों Form-7 भरे जा चुके हैं, और इसकी CCTV फुटेज जारी करने की मांग की गई है।

सेंट्रल इलेक्शन कमीशन का नियम है कि अगर किसी का नाम एक से ज़्यादा जगहों पर वोटर के तौर पर रजिस्टर है, तो गलत Form-7 भरने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान है। इसके बावजूद लाखों फॉर्म भरे गए हैं। कांग्रेस डेलीगेशन ने स्टेट इलेक्शन कमीशन को बताया है कि गलत Form-7 भरने वालों की लिस्ट जारी की जाए। इतना ही नहीं, अगर गलत Form-7 भरा है, तो क्रिमिनल एक्शन लें।

गौरतलब है कि वोटर के तौर पर नाम जोड़ने के लिए 6.88 लाख फॉर्म-6 भरे गए हैं। सीधे शब्दों में कहें तो नए वोटर के नाम जोड़ने से ज़्यादा फॉर्म वोटर के नाम कैंसिल करने के लिए भरे गए हैं। लेकिन, राज्य चुनाव आयोग फॉर्म-7 को लेकर कोई हंगामा करने को तैयार नहीं है।

भले ही यह नियम है कि अगर आपत्ति जताने वाला आवेदक सबूत नहीं देता है, तो फॉर्म-7 ऑफिस में भर देना चाहिए, लेकिन राज्य चुनाव आयोग BLO को वेरिफिकेशन के लिए घर-घर भेजता है। बिना सबूत के फॉर्म-7 कैंसिल करने की कोई कार्रवाई नहीं की जाती। कांग्रेस का आरोप है कि राज्य चुनाव आयोग का कहना है कि 9 लाख से ज़्यादा फॉर्म-7 मिले हैं, लेकिन डेढ़ लाख फॉर्म एंटर हो गए हैं। इसका मतलब है कि एक लाख दूसरे फॉर्म गलत हैं।

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Author: vatsalyanews

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