वात्सल्यम समाचार
मदन वैष्णव
डांग जिले के हेडक्वार्टर आहवा में मौजूद सिविल हॉस्पिटल में आजकल ऐसी अव्यवस्था है, मानो यह हेल्थ सर्विस की जगह न होकर गंदगी की जगह बन गया हो। हॉस्पिटल जैसी बहुत सेंसिटिव और पब्लिक इंटरेस्ट वाली जगह पर, जहाँ मरीज अपनी हेल्थ सुधारने आते हैं, वहाँ चारों तरफ गंदगी का साम्राज्य है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हॉस्पिटल की दीवारों पर लगी सभी धर्मों की बराबरी और कल्चरल वैल्यू दिखाने वाली तस्वीरों पर एंटी-सोशल और असभ्य लोगों ने पान-मसाला छिड़क दिया है। पवित्र ओम, क्रॉस, चांद-तारे और दूसरे धार्मिक निशानों के आसपास दिख रही गंदगी की परतें सिर्फ फिजिकल गंदगी नहीं हैं, बल्कि धार्मिक आस्था और सामाजिक वैल्यू का घोर अपमान हैं। ऐसी हरकतें करने वाले लोग पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं और हॉस्पिटल के पवित्र माहौल को शर्मसार कर रहे हैं। इस गंभीर स्थिति के पीछे हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन की बड़ी लापरवाही भी सामने आ रही है। अस्पताल के अधिकारियों ने दीवारों पर साफ-सफाई बनाए रखने के लिए बोर्ड लगाए हैं, लेकिन ये बोर्ड सिर्फ कागजी काम और सजावट का सामान साबित हो रहे हैं। असलियत यह है कि इन पर किसी तरह की निगरानी या मॉनिटरिंग नहीं हो रही है, जिसकी वजह से ऐसे लोगों को खुलेआम गंदगी फैलाने की छूट मिल गई है। अधिकारियों का सिर्फ बोर्ड लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेना लोगों की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। अगर वे सच में सफाई पर जोर देते हैं, तो इस तरह से धार्मिक निशानों का अपमान करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई? स्थानीय लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या ये नजारे देखने के बाद भी अधिकारी सो रहे हैं। अब समय आ गया है कि अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारी अपनी नींद से जागें और इस गंदगी को फैलाने वाले लोगों पर आंखें मूंद लें। अस्पताल के हर कोने पर CCTV कैमरों से सख्त मॉनिटरिंग होनी चाहिए और जो कोई भी पान-मसाला छिड़कता या गंदगी करता पकड़ा जाए, उसके खिलाफ भारी जुर्माना लगाकर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। जिस तरह से धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया गया है, उसे देखते हुए यह जरूरी है कि इन दीवारों को तुरंत साफ करके फिर से पवित्र किया जाए। अगर प्रशासन इस मामले में निष्क्रिय बना रहता है तो जनता की मांग है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी हाई लेवल जांच की जाए।









