यूरोपियन यूनियन (EU) ने ईरान को एक बड़ा पॉलिटिकल और डिप्लोमैटिक झटका दिया है। EU ने ईरान की सबसे ताकतवर मिलिट्री फोर्स मानी जाने वाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को ऑफिशियली टेररिस्ट ऑर्गनाइज़ेशन घोषित कर दिया है। यह फैसला गुरुवार को ब्रसेल्स में यूरोपियन विदेश मंत्रियों की एक अहम मीटिंग के दौरान लिया गया, जिससे यूरोपियन-ईरानी रिश्तों में और तनाव आने की संभावना है।
EU के इस फैसले के पीछे मुख्य वजह ईरान में हाल ही में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों को दबाने में IRGC की भूमिका बताई गई है। यूरोपियन देशों का मानना है कि IRGC ने प्रदर्शन कर रहे नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग किया और मानवाधिकारों का उल्लंघन किया। इसी वजह से, EU ने अब IRGC को अपनी टेररिस्ट लिस्ट में शामिल कर लिया है।
इस फैसले के चलते, IRGC के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। यूरोप में इसके सभी एसेट्स फ्रीज कर दिए जाएंगे, इसके फंडिंग सोर्स पर रोक लगा दी जाएगी और IRGC से जुड़े लोगों पर यूरोप में पूरी तरह से ट्रैवल बैन लगा दिया जाएगा। इसके अलावा, कोई भी यूरोपियन संस्था या व्यक्ति IRGC के साथ किसी भी तरह का बिजनेस नहीं कर पाएगा।
US, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया पहले ही IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुके हैं। अब, EU के इस कदम से पश्चिमी देशों और ईरान के बीच की खाई और चौड़ी होती दिख रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस फैसले से ईरान पर इंटरनेशनल दबाव बढ़ेगा, लेकिन साथ ही, इससे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता का खतरा भी बढ़ सकता है।
EU के इस कदम का यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने स्वागत किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा, “मैं खूनी ईरानी शासन के खिलाफ प्रतिबंधों और IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित करने का स्वागत करती हूं। यह फैसला बहुत पहले ले लिया जाना चाहिए था। जो शासन अपने ही लोगों के विरोध को खून बहाकर दबाता है, वह सच में आतंकवादी है। यूरोप ईरानी लोगों की आज़ादी की लड़ाई में उनके साथ खड़ा है।”
लेकिन EU के इस फैसले पर ईरान की तरफ से कड़ी प्रतिक्रिया आई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस फैसले को यूरोप की “बड़ी स्ट्रेटेजिक गलती” बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोप, अमेरिका की तरह चलकर, पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति में आग में घी डाल रहा है।










