सुप्रीम कोर्ट 2022 की PIL पर सुनवाई को तैयार, चुनावी घोषणापत्र के वादों पर राजनीतिक दलों की जवाबदेही तय करने की मांग

चुनाव के समय राजनीतिक दलों की ओर से किए जाने वाले वादों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल 2022 की जनहित याचिका अब सुनवाई के लिए लिस्ट होगी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच के सामने बुधवार को वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने इस मामले को लिस्ट करने की मांग की। कोर्ट ने मामले को लिस्ट करने पर सहमति दे दी है। याचिका में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से चुनावी घोषणापत्र को लेकर नियम बनाने की मांग की गई है। साथ ही राजनीतिक दलों को घोषणापत्र में किए गए वादों के लिए जवाबदेह बनाने की मांग भी की गई है।

वादे पूरे नहीं करने पर कार्रवाई की मांग

याचिका में कहा गया है कि चुनावी घोषणापत्र किसी पार्टी की सरकार बनाने के बाद की योजना और उसके काम करने के तरीके की जानकारी देता है। ऐसे में राजनीतिक दलों को घोषणापत्र में किए गए जरूरी और सही वादों को पूरा करने के लिए जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग से यह भी मांग की है कि जो राजनीतिक दल अपने घोषणापत्र के वादे पूरे नहीं करते, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसके तहत चुनाव चिन्ह जब्त करने और पार्टी की मान्यता खत्म करने जैसे कदम उठाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक दलों को ऐसे बड़े वादे करने से बचना चाहिए, जिनसे सरकारी खजाने पर ज्यादा बोझ पड़े। हालांकि, याचिका में यह भी कहा गया है कि हर चुनावी वादा गलत नहीं होता। इसलिए चुनाव आयोग को इस बारे में साफ नियम बनाने चाहिए।

AAP के घोषणापत्र का भी जिक्र

याचिका में आम आदमी पार्टी के 2013, 2015 और 2020 के चुनावी घोषणापत्र का जिक्र किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि पार्टी ने जनलोकपाल बिल और स्वराज बिल लाने का वादा किया था, लेकिन इन वादों को लागू करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए।

याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसी स्थिति कई राज्यों में देखने को मिलती है, क्योंकि राजनीतिक दलों और उनके चुनावी घोषणापत्र को लेकर केंद्र की ओर से कोई कानून नहीं बनाया गया है और चुनाव आयोग ने भी इस संबंध में पर्याप्त नियम नहीं बनाए हैं।

घोषणापत्र को कानूनी रूप से लागू करने की मांग

याचिका में यह दलील दी गई है कि मतदाता चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को देखकर भी अपना वोट तय करते हैं। याचिका के मुताबिक, अगर कोई पार्टी चुनाव जीतकर सरकार बनाती है तो घोषणापत्र में किए गए वादों को कानूनी रूप से लागू करने योग्य माना जाना चाहिए। याचिका में कानून मंत्रालय को राजनीतिक दलों और उनके घोषणापत्र को लेकर कानून बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है। इसके अलावा, वैकल्पिक तौर पर चुनाव आयोग को अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए राजनीतिक दलों के घोषणापत्र के लिए नियम बनाने को कहा गया है।

ये भी पढ़ें: 

राजपाल यादव को चेक बाउंस केस में बड़ी राहत, पैसे जमा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिया 2 हफ्ते का समय, कहा- ‘ये आखिरी मौका है’

vatsalyanews
Author: vatsalyanews

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!