वाव थराद जिला तो बन गया, लेकिन परिवहन बन गया ‘मौत का सफर’

वात्सल्य समाचार प्रवीणभाई चौहान वाव थराद

वाव-थराद जिला तो बन गया लेकिन आज भी यहां की मुख्य सड़कों पर यातायात पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। खासकर रात के समय कुछ वाहन चालक क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाकर खुलेआम सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं, जो यात्रियों के लिए सीधे तौर पर मौत का सफर है।

हालांकि लगभग चार सड़कों पर पुलिस नाके हैं, लेकिन ऐसे वाहन चालकों पर कोई नियंत्रण नहीं है। मानो कोई कानून ही न हो. यातायात नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है, लेकिन कार्रवाई शून्य है।

स्थानीय लोगों में काफी गुस्सा है. लोगों का सवाल है कि अगर इसी तरह कोई गंभीर हादसा हो जाए और निर्दोष लोगों की जान चली जाए तो जिम्मेदार कौन होगा? वाहन चालक, यातायात विभाग या कोई ऐसा सिस्टम जो मौके पर मौजूद होते हुए भी पलक झपकते रहता है?

जिला बनने के बाद उम्मीद थी कि सुविधाएं व सुरक्षा बढ़ेगी, लेकिन हकीकत तो यह है कि सड़कों पर भीड़ व असुरक्षा बढ़ती जा रही है. अब सवाल यह है कि क्या वाकई खाखी का खौफ खत्म हो गया है या कार्यवाही सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई है?

अगर जल्द से जल्द यातायात विभाग और पुलिस तंत्र द्वारा सख्त कदम नहीं उठाया गया तो किसी बड़े हादसे की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है.

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Author: vatsalyanews

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