‘ईरान के लोग अमेरिका के आतंकवाद का शिकार बन रहे’, राष्ट्रपति पेजेश्कियान का UN महासभा में बड़ा बयान

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अपने संबोधन के दौरान अमेरिका के साथ जारी संघर्ष को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के लोग अमेरिका और इजरायल  के आंतकवाद का शिकार बन रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जंग के मैदान से शांति नहीं आएगी। ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका की कार्रवाई को लेकर निशाना साधा और कहा कि इसे सैन्य तरीके से हल नहीं किया जा सकता। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा के स्टेज से ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई के प्रभावों का भी उल्लेख किया। पेजेश्कियान ने कहा कि पिछले 200 वर्षों में ईरान ने कभी किसी देश पर हमला नहीं किया।

अली खामेनेई की तस्वीर दिखाई

पेजेश्कियान ने इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले में मारे गए  सुप्रीम लीडर अली खामेनेई और युद्ध के शुरुआती दिनों में मारे गए 150 से अधिक स्कूली बच्चों की बड़ी तस्वीरें भी दिखाईं। उन्होंने कहा-हमने केवल अपना बचाव किया है। हम आतंकवादी नहीं हैं। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका और इजराइल ने उनके देश पर हमला किया, लेकिन ईरान ने घुटने नहीं टेके। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लेते हुए कहा कि ईरान बातचीत, कूटनीति और वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन बल प्रयोग की भाषा स्वीकार नहीं करेगा।

इजरायल पर भी लगाए गंभीर आरोप 

ईरानी राष्ट्रपति ने इजरायल पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इजरायल अलग-अलग शहरों और प्रांतों में इलाकों को निशाना बनाता है और हत्याएं करता है। गाजा का जिक्र करते हुए पेजेश्कियान ने दावा किया कि वहां 80 हजार से ज्यादा निर्दोष नागरिक मारे गए हैं। अपने भाषण के आखिर में, पेजेशकियन ने ट्रंप का नाम लेकर उनका नाम लिया। उन्होंने कहा, “मिस्टर ट्रंप और जो लोग हमें धमकाना चाहते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि हम बिना ज़ोर-ज़बरदस्ती की भाषा को माने बातचीत, डिप्लोमेसी और बातचीत के लिए तैयार हैं।” उन्होंने एक और बात कही जो काफ़ी गलत थी: “हमने आम लोगों पर हमला नहीं किया।”

ट्रंप ने तबाह करने की दी थी धमकी

पेजेश्कियान का यह संबोधन डोनाल्ड ट्रंप के संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए भाषण के एक दिन बाद आया।  ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में चेतावनी दी कि अगर जल्द समझौता नहीं हुआ तो वह इस इस्लामी गणराज्य को ”तबाह” कर सकते हैं। साथ ही ट्रंप ने यह उम्मीद जताई थी कि नवंबर में इलेक्शन के बाद ईरान के साथ डील हो जाएगी। ट्रंप ने कहा कि वो जंग से भाग नहीं रहे हैं। जो लोग ये कह रहे हैं कि अमेरिका के पास हथियारों की कमी हो गई है। वो पूरी तरह गलत हैं। अमेरिका अभी भी अपने साथियों को हथियारों की सप्लाई कर रहा है। वो ईरान को एक और मौका देना चाहते हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी फोर्सेज ने ईरान को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। ईरान की पूरी नेवी…एयरफोर्स और आर्मी को पूरी तरह खत्म कर दिया है…लेकिन अगर ईरान बातचीत की टेबल पर आता है तो वो ईरान को फिर आबाद करेंगे.। ईरान को इस्लामिक मुल्कों में सबसे ताकतवर और मजबूत देश बनाएंगे।

 ईरानी अधिकारियों के साथ तीन घंटे बैठक

इसके कुछ घंटे बाद ट्रंप ने बताया कि उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने ईरानी अधिकारियों के साथ करीब तीन घंटे बैठक की। ट्रंप ने बैठक को “बहुत अच्छी” बताया, हालांकि उन्होंने इसके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा था कि ट्रंप न्यूयॉर्क में पेजेश्कियान से मुलाकात के लिए तैयार हैं।

हालांकि, ईरान ने इस बैठक को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि कतर की मध्यस्थता में हुई अप्रत्यक्ष बातचीत कोई नई बात नहीं है। ईरान ने अमेरिका से अपने बंदरगाहों की नाकाबंदी खत्म करने और फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियां जारी करने की मांग दोहराई है।

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Author: vatsalyanews

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