वेट लॉस के दौरान क्यों बढ़ जाती है मीठा खाने की क्रविंग? डॉक्टर ने बताया इसकी पीछे की वजह

आज के समय वेट लॉस करना काफी चैलेंजिंग हो गया है। जब लोग वजन घटाना शुरू करते हैं, तो अक्सर एक अजीब सी क्रेविंग होती है। आप जितना अपनी डाइट पर कंट्रोल करने की कोशिश करें, मीठा खाने की क्रेविंग उतनी ही बढ़ जाती है। दोपहर के खाने के बाद या रात को डिनर के बाद कुछ न कुछ मीठा खाने की बहुत ज्यादा क्रेविंग होती है। कई बार तो इतनी ज्यादा क्रेविंग होती है कि इसे कंट्रोल कर पाना मुश्किल हो जाता है और लोग न चाहते हुए भी मीठा खा लेते हैं। लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा है कि ऐसा क्यों होता है। दरअसल इसके पीछे एक शारीरिक (physiological) कारण भी है जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। डॉ. प्रसन्ना कार्तिक एस, जनरल फिजिशियन एंड सीनियर कंसलटेंट, इंटरनल मेडिसिन, ग्लेनेगल्स बता रहे हैं कि ऐसा क्यों होता है। 

हार्मोनल चेंजेज की वजह से होती है मीठी खाने की क्रेविंग 

  • घ्रेलिन: यह हार्मोन भूख बढ़ाने का काम करता है। जब आप कैलोरी कम लेते हैं, तो भूख के ये संकेत और तेज करता है।
  • लेप्टिन: यह हार्मोन शरीर के फैट से बनता है, जो दिमाग को एनर्जी और भूख को कंट्रोल करने में मदद करता है। वजन/फैट कम होने पर लेप्टिन का स्तर घटने लगता है। इन बदलावों के कारण व्यक्ति को ज्यादा भूख महसूस होती है और लंबे समय तक वजन घटाना मुश्किल लगने लगता है।
  • एनर्जी बचाने का तरीका: हमारा शरीर अपनी बची हुई ऊर्जा की रक्षा करने के लिए बना है। जब कैलोरी की कमी होती है, तो शरीर को लगता है कि एनर्जी की कमी हो रही है। इस वजह से खाने की क्रेविंग होती है और खासतौर पर मीठा खाने का मन करता है। इसलिए वजन घटाने के दौरान शुगर क्रेविंग हमेशा अनुशासन की कमी नहीं होती, बल्कि यह डाइट में की गई कटौती पर शरीर की एक नेचुरल रिएक्शन हो सकती है।
  • खाना छोड़ना, बहुत स्ट्रिक्ट डाइट फॉलो करना, या पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और फाइबर न लेना भी कारण हो सकता है। इससे खाना खाने के तुरंत बाद फिर से भूख लगने लगती है।
  • वहीं कुछ लोगों में ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव से भी ऐसा महसूस हो सकता है, हालांकि मीठा खाने की क्रेविंग का मतलब हमेशा लो ब्लड शुगर होना नहीं होता।
  • मीठी चीजें दिमाग के उस हिस्से को सक्रिय करती हैं जो खुशी और संतुष्टि से जुड़ा है। जब कोई व्यक्ति तनाव में होता है, नींद पूरी नहीं लेता, या पसंदीदा खाने से दूर रहता है, तो मीठे की तलब बढ़ जाती है। किसी भी खाने को पूरी तरह से “मना” कर देने से संतुलित डाइट बनाए रखना और मुश्किल हो जाता है।

क्रेविंग को कैसे कंट्रोल करें? 

  • अपनी डाइट में भरपूर पोषण, प्रोटीन और फाइबर लें।
  • भोजन समय पर करें और कैलोरी की कटौती उतनी ही करें जो शरीर संभाल सके।
  • अच्छी नींद, स्ट्रेस मैनेजमेंट और फिजिकल एक्टिविटी भी भूख को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

डॉक्टर की सलाह कब लें? 


कभी-कभार मीठा खाने का मन होना आम बात है और इसका मतलब यह नहीं है कि डायबिटीज या कोई हार्मोनल समस्या है। हालांकि, अगर बहुत ज्यादा प्यास लगने, बार-बार पेशाब आने या बिना वजह थकान महसूस होने के साथ लगातार मीठा खाने की क्रेविंग हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। 

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Author: vatsalyanews

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