अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी, विपक्ष अगले दो हफ्तों के अंदर करेगा पेश

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दल संसद के दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों से संपर्क शुरू कर दिया है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, प्रस्ताव का नोटिस अगले दो सप्ताह के भीतर संसद में पेश किया जाएगा। INDI गठबंधन यानी विपक्षी पार्टियों ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

SIR पर गड़बड़ी का खेल!

यह घटनाक्रम चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच बढ़े विवाद के बीच सामने आया है। हाल में सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर पिछले 10 महीनों में कई बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए पहले भी नोटिस 

विपक्षी दलों ने इस रिपोर्ट को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। रिपोर्ट के अनुसार, विपक्षी दलों ने इससे पहले भी ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नोटिस दिए थे। अप्रैल 2026 में राज्यसभा में विपक्षी सांसदों की ओर से हटाने का नोटिस दिया गया था, जिस पर 73 सांसदों के हस्ताक्षर होने की बात सामने आई थी।

दोनों सदनों में नए सिरे से प्रस्ताव पेश करने की तैयारी

अब कांग्रेस विपक्षी दलों को साथ लाकर दोनों सदनों में नए सिरे से प्रस्ताव पेश करने की तैयारी में है। हालांकि, प्रस्ताव को पारित कराने के लिए संसद में आवश्यक समर्थन जुटाना एक अलग संवैधानिक प्रक्रिया होगी।

संसद में निर्धारित प्रक्रिया का करना होता है पालन

बता दें कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत निर्धारित है। इसके लिए संसद में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है। वहीं, अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष एक बार फिर एकजुट हो गया है।

चुनाव आयोग ने दी इस पर सफाई

दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने देशभर में मतदाता सूची के ‘SIR’ के दौरान नाम जोड़े और हटाए जाने समेत कई मुद्दों पर आपत्तियां जताई थीं। दूसरी तरफ, निर्वाचन आयोग ने कहा कि विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग मत होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। उसके सभी फैसले स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप हैं। (भाषा के इनपुट के साथ)

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Author: vatsalyanews

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